औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के कमजोर आंकड़ों, जीडीपी की चिंताओं और अमेरिका व चीन के बीच व्यापार समझौते को लेकर असमंजस के चलते बुधवार को सेंसेक्स में 229 अंकों की कमजोरी दर्ज की गई। इसके अलावा हांगकांग में तनाव और रुपये के डॉलर की तुलना में 72 से नीचे जाने से भी भारतीय निवेशकों की धारणा कमजोर बनी रही।
दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स में 386 अंक का उतार-चढ़ाव देखने को मिला और आखिर में सेसेक्स 229.02 अंक कमजोर होकर 40,116.06 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 73 अंकों की गिरावट के साथ 11,840.45 के स्तर पर रह गया।
6.51 फीसदी की गिरावट के साथ यस बैंक सेंसेक्स में सबसे ज्यादा गिरने वाला शेयर रहा। उसके बाद एसबीआई, एक्सिस बैंक, वेदांत, सन फार्मा, आईसीआईसीआई बैंक, इंडसइंड बैंक, आईटीसी, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे, जिनमें 3.69 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली। दूसरी तरफ टीसीएस, आरआईएल, एचयूएल, मारुति और एनटीपीसी में 3.76 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं अमेरिका और चीन के बीच चल रही व्यापार वार्ता पर एक बार फिर से सवाल उठ गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन पर धोखा देने का आरोप लगाया। वहीं हांगकांग में हिंसक प्रदर्शन के चलते शंघाई, हांगकांग, तोक्यो और सियोल के बाजारों में 1.82 फीसदी तक गिरावट रही।
सोमवार को आए आईआईपी के आंकड़ों से आर्थिक सुस्ती गहराने के संकेत मिले। दरअसल, विनिर्माण, खनन और विद्युत क्षेत्रों में सुस्ती के चलते सितंबर में आईआईपी में 4.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो लगभग सात साल का निचला स्तर है। उधर, एक दिन पहले एसबीआई ने भी वित्त वर्ष 2019-20 मे
रुपये ने तोड़ा 72 का स्तर
कमजोर आर्थिक संकेतकों के बीच बुधवार को रुपये ने डॉलर की तुलना में 72 का स्तर तोड़ दिया। कारोबार के दौरान रुपया 62 पैसे कमजोर होकर 72.09 के स्तर पर बंद हुआ। रुपये का यह 4 सितंबर के बाद का निचला स्तर है और 16 सितंबर के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि आईआईपी के खराब आंकड़ों और वैश्विक संकेतों में कमजोरी से रुपये पर दबाव खासा बढ़ गया है।