घरेलू शेयर बाजार में शुरुआती बढ़त के बावजूद बुधवार को सपाट क्लोजिंग हुई। प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक अपनी बढ़त के सिलसिले को बरकरार नहीं रख पाए और मामूली बढ़त के साथ बस हरे निशान पर बंद भर हो सके। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन सेंसेक्स 50.15 अंकों की बढ़त के साथ 82.276.07 जबकि निफ्टी 57.85 अंक चढ़कर 25,482.50 के स्तर पर बंद हुआ। बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 90.95 (अस्थायी) के स्तर पर स्थिर रहा।
बाजार पर विशेषज्ञों की राय
वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों और अमेरिकी टेक शेयरों में एआई संबंधी अनिश्चितता कम होने से भारतीय बाजार गैप-अप के साथ खुले थे। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने बताया कि बैंक ऑफ जापान के नरम रुख ने एशियाई बाजारों को समर्थन दिया, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति की टैरिफ केंद्रित नई टिप्पणियों और रुपये के मूल्यह्रास के कारण बाजार ने अपनी शुरुआती मजबूती खो दी।
ऑनलाइन ट्रेडिंग फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, किसी मजबूत घरेलू ट्रिगर के अभाव और मिश्रित वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों ने आक्रामक रुख अपनाने से परहेज किया। उन्होंने यह भी कहा कि ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली ने बाजार की धारणा को काफी प्रभावित किया।
जानिए दुनिया के बाजार में क्या चल रहा
वैश्विक बाजार की बात करें तो दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का शंघाई कंपोजिट, जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भारी बढ़त के साथ बंद हुए। यूरोप के बाजार भी सकारात्मक दायरे में कारोबार कर रहे थे, जबकि अमेरिकी बाजार मंगलवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे।
एक्सचेंज डेटा के अनुसार, मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 102.53 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने बाजार को समर्थन देते हुए 3,161.22 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इस बीच, वैश्विक कमोडिटी बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.14 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 70.67 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
बुधवार का कारोबारी सत्र इस बात का साफ संकेत है कि वैश्विक व्यापार चिंताओं और टैरिफ जैसे भू-राजनीतिक मुद्दों के कारण भारतीय बाजारों में अब भी अस्थिरता बनी हुई है। आगे चलकर निवेशकों की नजर घरेलू और वैश्विक ट्रिगर्स पर रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।