बाजार नियामक सेबी ने निवेशकों का पैसा लौटाने की समयसीमा कम कर चार दिन करने का निर्णय किया। इसके तहत अगर निवेशक को न्यूनतम संख्या में संबंधित शेयर नहीं मिलता है या निर्गम जारी करने वाला शेयर बाजारों से सूचीबद्ध होने या कारोबार की मंजूरी प्राप्त करने में विफल रहता है, उसे ऐसी स्थिति में निवेशकों का पैसा चार दिन में लौटाना होगा। इस समयसीमा को कम कर अब चार दिन कर दिया गया है।
इस बात पर गौर करते हुए समयसीमा कम की गई है कि सार्वजनिक निर्गम में सभी आवेदनकर्ताओं के लिए एएसबीए (एप्लीकेशन सपोर्टेड बाई ब्लॉक्ड अमाउंट) अब अनिवार्य है। इस व्यवस्था के तहत आवेदन राशि का हस्तांतरण नहीं होता बल्कि उसे निवेशक के खाते में 'रोक कर रखा जाता है।' शेयर आबंटन होने के बाद ही राशि ली जाती है।
इसके अलावा सार्वजनिक निर्गम में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) व्यवस्था के बाद अगर मध्यस्थ एएसबीए खाते में संबंधित राशि को निर्गम बंद होने की तिथि से चार कार्य दिवस के भीतर मुक्त नहीं करते हैं , तो वे निवेशकों को क्षतिपूर्ति के लिये जवाबदेह होंगे।
इस संदर्भ में भारतीय प्रतिभूति एवं विनमय बोर्ड (सेबी) ने कहा कि, 'बाजार प्रतिभागियों से विचार-विमर्श के बाद, निवेशकों का पैसा लौटाने की समयसीमा कम कर चार दिन करने का निर्णय किया गया है।'
एनएसई ने निफ्टी 50 डेरिवेटिव सौदों के लिए बाजार लॉट आकार घटाया
मालूम हो कि एनएसई ने निफ्टी 50 में शामिल शेयरों के डेरिवेटिव सौदों के लिए बाजार लॉट आकार घटा दिया है। इस कदम से खुदरा व्यापारियों के लिए अत्यधिक अपफ्रंट मार्जिन के बोझ में कमी आएगी। एनएसई ने एक परिपत्र में कहा कि लॉट आकार को मौजूदा 75 से घटाकर 50 कर दिया गया है। शेयर ब्रोकिंग फर्म फायर्स के सीईओ तेजस खोडे ने कहा कि लॉट आकार में कमी से वायदा कारोबार के लिए मार्जिन जरूरतों में एक तिहाई की कमी आएगी। उन्होंने कहा कि इस समय कारोबारियों को एक सौदा करने के लिए लगभग 1,73,000 रुपये की जरूरत होती है। जुलाई से मार्जिन की आवश्यकता घटकर लगभग 1,16,000 रुपये (वर्तमान निफ्टी की कीमतों पर) हो जाएगी।