शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए ये खबर महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। निवेशक जल्द ही ब्रोकर्स की बजाय सीधे स्टॉक एक्सचेंज से शेयर की खरीद व बिक्री कर सकते हैं। बाजार नियामक सेबी कथित तौर पर खुदरा निवेशकों को डायरेक्ट मार्केट एक्सेस (डीएमए) की अनुमति देने पर विचार कर रहा है।
यदि नियामक निर्णय के साथ आगे बढ़ता है, तो भारत का ब्रोकिंग उद्योग एक बड़ा बदलाव देखेगा। यह उनके अस्तित्व को भी खतरे में डाल सकता है। मालूम हो कि मौजूदा समय में निवेशक शेयरों की खरीद-बिक्री सीधे एक्सचेंज से नहीं कर सकते हैं। निवेशक ब्रोकर्स के जरिए लेन-देन करते हैं।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष 10 ब्रोकर अकेले उद्योग के आकार का 63 फीसदी से अधिक योगदान देते हैं। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभार्थी भारत का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज बीएसई होगा। साथ ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई), जो आने वाले समय में आईपीओ की तैयारी कर रहा है। इस रिपोर्ट के बाद कल बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का स्टॉक नौ फीसदी चढ़ा।
भारत के सबसे बड़े ऑनलाइन स्टॉक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में से एक, Zerodha के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने ने ट्विटर पर लिखा कि डीएमए उपलब्ध है, लेकिन ब्रोकर के माध्यम से। क्या बिना ब्रोकर के रिटेल की पेशकश की जा सकती है? एक ब्रोकर के लिए सबसे बड़ा काम ग्राहक के सवालों, शिकायतों आदि को संभालना है। उद्योग के पास इसके लिए हजारों कर्मचारी हैं। क्या एक्सचेंज इस पर नियंत्रण कर सकते हैं और ग्राहक की शिकायतों के बाद खुद को विनियमित करने के लिए एक नियामक के रूप में भी कार्य कर सकते हैं?
भारतीय ऑनलाइन ट्रेडिंग उद्योग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। मार्च 2019 की एचडीएफसी सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडस्ट्री इंटरनेट ट्रेडिंग का हिस्सा वित्त वर्ष 2013 में 22 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2018 में 29 फीसदी हो गया है। जैसे-जैसे वित्तीय जागरूकता बढ़ रही है, अधिक से अधिक मिलेनियल्स स्टॉक ट्रेडिंग की ओर बढ़ रहे हैं।