वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार पैदा करने का खाका पेश किया। आर्थिक पैकेज का विश्लेषण करते हुए उन्होंने मजदूरों, कामगारों, छोटे कारोबारियों और मध्य वर्ग के लिए राहतों को पिटारा खोला। साथ ही सीएलएसएस और रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स जैसी योजनाओं के जरिये रियल एस्टेट क्षेत्र को मजबूती देने की आधारशिला रखी।
रोजगार पर जोर
वित्तमंत्री के अनुसार, मछुआरों और पशुपालकों को किसान क्रेडिट योजना में शामिल किया गया है। इसमें करीब 2 लाख करोड़ रुपये के रियायती कर्ज बांटे गए जिससे किसानों के साथ इन ग्रामीण उद्योगों से जुड़े लोगों को भी रोजगार बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा रबी और खरीफ की खराब फसल कटाई से किसानों को बचाने के लिए भी 30 हजार करोड़ की मदद आपात कार्यगत पूंजी के तौर पर दी गई है। यह राशि लघु एवं सीमांत किसानों तक नाबार्ड और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के जरिये पहुंचेगी। 3 करोड़ किसान इसका लाभ उठा सकेंगे। आदिवासी मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने को सरकार ने 6 हजार करोड़ की राशि दी है, जो कैम्पा फंड के तहत जारी किए जाएंगे। इसका इस्तेमाल वनीकरण, पौधरोपण, कृत्रिम और प्राकृतिक उत्थान, वन प्रबंधन, मिट्टी एवं नमी संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण एवं प्रबंधन में किया जाएगा। इससे शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नौकरी के अवसर पैदा होंगे।
लॉकडाउन की भरपाई
रेहड़ी पटरी वालों को लॉकडाउन के दौरान काफी नुकसान हुआ है और उन्हें अपना रोजगार दोबारा शुरू करने में मुश्किल आएगी। इसके लिए सरकार ने अलग से 5 हजार करोड़ का क्रेडिट सुविधा फंड बनाया है, जहां से 10 हजार का शुरुआत कर्ज लेकर स्थितियां सामान्य होने पर कारोबार शुरू कर सकेंगे। इस कदम से देशभर के 50 लाख रेहड़ी-पटरी वालों को रोजगार चलाने में मदद मिलेगी जो शहरी क्षेत्र में पैसे कमाने का बड़ा साधन बनकर उभरेगा।
मध्य आय वालों को मिलेगा सस्ता मकान
वित्तमंत्री ने मध्य आय वर्ग (एमआईजी) को मकान खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी का दायरा बढ़ा दिया है। हालांकि, बजट में ही सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना का दायरा बढ़ाने की बात कही थी। इसके तहत सालाना 6 लाख से 18 लाख तक की आय वालों को क्रेडिट लिंक सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) के जरिये सस्ती दरों पर कर्ज के साथ ब्याज भुगतान में सब्सिडी भी दी जाती है। 31 मार्च 2020 तक इस योजना के तहत 3.3 लाख परिवारों ने फायदा उठाया था और योजना अगले साल 31 मार्च तक बढ़ाए जाने से 2.5 लाख और परिवारों को लाभ मिलेगा। सरकार का अनुमान है कि योजना का दायरा बढ़ाने से हाउसिंग सेक्टर में 70 हजार करोड़ का निवेश आएगा। इससे स्टील, लोहा व अन्य निर्माण सामग्रियों की मांग बढ़ेगी और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कीम की तारीख बढ़ाने से कठिन आर्थिक हालात के बावजूद मिडिल क्लास का मकान खरीदने का सपना पूरा होगा और रियल एस्टेट की हालत में भी सुधार होगा जो तैयार मकानों की बिक्री न होने से परेशान है।
मध्यवर्ग को होम लोन पर इतना सीएलएसएस
| विवरण |
एमआईजी-1 |
एमआईजी-2 |
| सालाना आय |
6-12 लाख |
12-18 लाख |
| लोन की अवधि |
20 साल |
20 साल |
| कर्ज की राशि |
9 लाख तक |
12 लाख तक |
| कारपेट एरिया |
160 वर्गमीटर |
200 वर्गमीटर |
| ब्याज सब्सिडी |
4 फीसदी |
3 फीसदी |