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रुपये को संभालने के लिए कड़े कदम संभव: एलटीसीजी टैक्स पर सीतारमण के संकेत से बाजार में जगी आस, जानिए क्या असर

Tue, 13 Oct 2026 04:14 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रुपये की स्थिरता के लिए आरबीआई उठा सकता है और कड़े कदम! LTCG टैक्स चर्चा पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के संकेत से शेयर बाजार 1,000 अंक उछला। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए तुरंत क्लिक करें!
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निर्मला सीतारमण - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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भारतीय मुद्रा रुपये में जारी गिरावट और अस्थिरता को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आने वाले दिनों में और भी कड़े नियामकीय कदम उठा सकता है। नई दिल्ली में आयोजित 'ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम' में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि केंद्रीय बैंक का मकसद रुपये की विनिमय दर को किसी निश्चित स्तर पर स्थिर करना नहीं, बल्कि करेंसी में अत्यधिक उतार-चढ़ाव पर अंकुश लगाना है। इसके साथ ही, लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) पर हितधारकों की प्रतिक्रियाओं पर विचार करने की वित्त मंत्री की टिप्पणी ने घरेलू शेयर बाजार में जोरदार तेजी ला दी, जिससे निवेशकों की संपत्ति में कुछ ही घंटों के भीतर 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हो गया।

रुपये में उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए आरबीाई ने क्या कड़े कदम उठाए हैं?

वित्त मंत्री के अनुसार, बीते एक साल में रुपये में आई गिरावट काफी अहम रही है, जिसका मुख्य कारण वैश्विक चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां हैं। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने मुद्रा को संभालने के लिए प्रत्यक्ष और नियामकीय दोनों स्तरों पर मोर्चा खोल रखा है:

  • डॉलर की बिक्री और डायरेक्ट इंटरवेंशन: सोमवार को डॉलर की मांग पर अंकुश लगाने के लिए रिजर्व बैंक ने बाजार में सीधे डॉलर की बिक्री की, जिससे रुपये ने पिछले छह महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त दर्ज की।
  • फॉरेक्स हेजिंग नियमों में सख्ती: रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा हेजिंग के लिए कैश डिपॉजिट आवश्यकताओं का दायरा बढ़ा दिया है, जिसमें अब बैंकों की अपनी परिसंपत्तियों और देनदारियों के हेजिंग सौदों को भी शामिल कर लिया गया है।
  • नॉन-डिलीवरेबल डेरिवेटिव्स पर अंकुश: अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) में सक्रिय बैंक इकाइयों और प्राथमिक डीलरों के लिए गैर-निवासियों को दिए जाने वाले नॉन-डिलीवरेबल रुपया डेरिवेटिव्स (एनडीडीसी) के नियमों को कड़ा किया गया है। अब इन्हें केवल हेजिंग उद्देश्यों के लिए ही उपलब्ध कराया जा सकता है।

एलटीसीजी टैक्स पर वित्त मंत्री के बयान से शेयर बाजार में भारी तेजी क्यों आई?

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली और वैश्विक दबावों के बीच वित्त मंत्री द्वारा एलटीसीजी टैक्स संरचना पर चर्चा के संकेत देते ही शेयर बाजार में रिकवरी आई। 

  • बाजार में बड़ा उछाल: वित्त मंत्री की टिप्पणी के तुरंत बाद बीएसई सेंसेक्स 1,000 अंकों से अधिक उछलकर 72,900 के पार पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 300 से अधिक अंक चढ़कर 22,700 के स्तर को पार कर गया।
  • निवेशकों की वेल्थ में इजाफा: आईटी शेयरों की अगुवाई में आई इस तेजी से सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर 469 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिससे निवेशकों को सीधे तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ हुआ।
  • एसबीआई रिसर्च की सिफारिश: गौरतलब है कि एसबीआई रिसर्च ने अपनी 'इकोव्रैप' रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि निवेशकों को लंबे समय तक भारतीय बाजार में बनाए रखने के लिए इक्विटी पर एलटीसीजी टैक्स को समाप्त करने पर विचार किया जाना चाहिए।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद कितनी मजबूत है?

विदेशी पूंजी की निकासी और करेंसी दबाव के बावजूद वित्त मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आश्वस्त किया है कि भारत के व्यापक आर्थिक सूचकांक बेहद मजबूत स्थिति में हैं।

  • राजकोषीय अनुशासन पर भरोसा: निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद सरकार राजकोषीय अनुशासन से कोई समझौता नहीं करेगी और निवेशकों को किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
  • क्षेत्रीय प्रभाव: आईटी और निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों को जहां कमजोर रुपये और कर समीक्षा के संकेतों से बल मिला है, वहीं रिजर्व बैंक के लिक्विडिटी और डेरिवेटिव्स से जुड़े कदमों से बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र में विनिमय जोखिम कम होने की उम्मीद है।

रुपये की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए रिजर्व बैंक के नियामकीय नियंत्रण और वित्त मंत्री की ओर से एलटीसीजी टैक्स पर लचीला रुख दिखाने से वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बना है। ऐसे में उम्मीद है कि आने वाले समय में करेंसी और इक्विटी दोनों बाजारों में स्थिरता लाने के लिए आगे भी लक्षित कदम उठाए जाते रहेंगे।

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