रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने 53,125 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू पर शेयरधारकों के सवालों का जवाब देने के लिए चैटबॉट शुरू किया है। मुकेश अंबानी की कंपनी ने अपनी नई भागीदार फेसबुक के व्हाट्सएप के जरिए शेयरधारकों को राइट्स इश्यू पर किसी तरह की जानकारी के लिए इसकी शुरुआत की है।
सार्वजनिक निर्गम के लिए पहली बार पेश हुआ चैटबॉट
मामले से जुड़े सूत्रों ने कहा कि सार्वजनिक निर्गम के लिए पहली बार इस तरह का चैटबॉट पेश किया गया है। इसे जियो हैपटिक टेक्नोलॉजीज ने विकसित किया है। कंपनी पहली बार शेयर बाजार के निवेशकों को मदद के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल कर रही है।
इन भाषाओं में मिलेगा जवाब
सूत्रों ने कहा कि एआई आधारित चैटबॉट 53,125 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू पर शेयरधारकों के सवालों का जवाब देता है। यह किसी भारतीय कंपनी द्वारा लाया गया सबसे बड़ा राइट्स इश्यू है। चैटबॉट द्वारा जवाब अंग्रेजी में दिए जाते हैं। वहीं एफएक्यू यानी बार-बार पूछे जाने वाले सवालों पर वीडियो अंग्रेजी, हिंदी, मराठी, कन्नड़, गुजराती और और बांग्ला में है।
26 लाख से अधिक शेयरधारक
कंपनी के शेयरधारकों की संख्या 26 लाख से अधिक है। वहीं देश में व्हाट्सएप के प्रयोगकर्ताओं की संख्या 40 करोड़ है। इस चैटबॉट पर प्लस 91-79771 11111 पर मैसेज भेजकर पहुंचा जा सकता है। इस बारे में संपर्क करने पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रवक्ता ने कोई टिप्पणी करने से इनकार किया। रिलायंस इंडस्ट्रीज का 53,125 करोड़ रुपये का राइट्स इश्यू 20 मई को खुला था और यह तीन जून को बंद होगा।
क्या है राइट्स इश्यू?
दरअसल पूंजी जुटाने के लिए शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कंपनियां राइट्स इश्यू लाती हैं। राइट्स इश्यू के जरिए कंपनियां अपने मौजूदा शेयरधारकों को ही अतिरिक्त शेयर खरीदने के लिए मंजूरी देती हैं। शेयरधारक एक निश्चित अनुपात में शेयर खरीद सकते हैं, जो कंपनी तय करती है। यानी शेयरधारक कंपनी की ओर से तय अवधि में राइट्स इश्यू के तहत शेयर खरीद सकते हैं। हालांकि इसके जरिए कंपनी के मालिकाना हक पर कोई असर नहीं पड़ता है।
राइट्स पेशकश के जरिए कंपनियां मौजूदा शेयरधारकों को घटी दरों पर नए शेयर खरीदने का अधिकार देती हैं, लेकिन उन पर ऐसा करने की बाध्यता नहीं होती। आरआईएल ने अंतिम बार 1991 में परिवर्तनीय ऋणपत्र जारी कर जनता से धन जुटाया था।