इस साल प्याज उपभोक्ताओं को नहीं बल्कि किसानों को रुला रहा है। दिल्ली जैसी मंडी में भी किसानों को प्याज के असली दाम के रूप में 50 पैसे से 3 रुपये प्रति किलो प्राप्त हो रहे हैं। इतने कम दाम पर प्याज बेचने के बजाय किसान अब प्याज को खेतों में ही छोड़ देना बेहतर मान रहे हैं। 12 रुपये प्रति किलोग्राम से कम दाम पर बेचने पर किसान प्याज की लागत भी नहीं निकाल पाते हैं।
दूसरी तरफ सरकार की कार्रवाई और उपलब्धता बढ़ने की वजह से चीनी व दाल के भाव में नरमी का रुख है। मंगलवार को एम ग्रेड चीनी की थोक कीमत 35 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई। दिल्ली की आजादपुर मंडी में मंगलवार को थोक कारोबारियों ने 4-7 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज की खरीदारी की। कारोबारी राजेंद्र शर्मा ने बताया कि अभी दिल्ली की मंडी में राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र व गुजरात से प्याज की आवक हो रही है।
उन्होंने बताया कि इन जगहों से प्याज को दिल्ली की मंडी तक लाने में किसानों को प्रति किलो 3-3.50 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में किसानों को प्याज की असली कीमत 50 पैसे से 3.50 रुपये तक ही मिल रही है। मंडी में आने वाले किसानों के मुताबिक सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद 50 पैसे किलो प्याज बेचने से अच्छा है कि प्याज को खेत में छोड़ दिया जाए। इस साल प्याज के उत्पादन में बढ़ोतरी से प्याज की आवक काफी बढ़ी हुई है। दिल्ली की आजादपुर मंडी में अभी रोजाना प्याज की 120 गाड़ियां आ रही हैं जबकि मांग 70-80 गाड़ी की ही है।
दूसरी तरफ सरकार की सख्ती व मांग के मुकाबले चीनी की पर्याप्त उपलब्धता की वजह से चीनी के दाम में गिरावट का रुख जारी है। 10-15 दिन पहले चीनी की थोक कीमत 38-39 रुपये प्रति किलो के स्तर पर थी जो गिरकर 35 रुपये हो चली है। देश में चीनी की सालाना खपत 255 लाख टन है। इस साल 30 अप्रैल तक 243 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है और पिछले साल का 90 लाख टन का स्टॉक है। ऐसे में इस साल चीनी की कमी होने के आसार नहीं हैं।
दाल कारोबारियों ने बताया कि म्यांमार में वाटर फेस्टिवल की वजह से वहां से शिपमेंट नहीं हो रही थी, लेकिन शिपमेंट अब शुरू हो गई है। वहीं मूंग की नई फसल भी जल्द ही बाजार में आ जाएगी। उन्होंने बताया कि उड़द, अरहर जैसी सभी दालों में नरमी है। कारोबारी स्टॉक रखने से भी बच रहे हैं।