देश के आर्थिक परिदृश्य में भले ही कैशलेस चर्चा में आया नया शब्द हो सकता है, लेकिन असम में कई वर्षों से हो रहा है। दरअसल गुवाहाटी से 32 किमी. दूर छोटे से कस्बे में असम की तिवा जनजाति के लोग हर साल एक अनोखे व्यापारिक मेले का आयोजन करते हैं, जिसमें सारा लेनदेन सिर्फ और सिर्फ कैशलेस होता है।
मध्य असम और पड़ोसी मेघालय की जनजाति तिवा असम के मोरीगांव जिले में जनवरी के तीसरे हफ्ते में सालाना तीन दिवसीय मेले जुनबील का आयोजन करती है और इस समुदाय ने पांच से भी ज्यादा सदियों से वस्तु विनिमय व्यापार की व्यवस्था को बनाए रखा है। मेले का हाल ही में समापन हुआ है।