फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

असम के गांव में पांच दशकों से हो रहा कैशलेस ट्रांजेक्शन

Mon, 23 Jan 2017 05:39 PM IST
एजेंसी/गुवाहाटी
विज्ञापन
Jonbeel mela
विज्ञापन
देश के आर्थिक परिदृश्य में भले ही कैशलेस चर्चा में आया नया शब्द हो सकता है, लेकिन असम में कई वर्षों से हो रहा है। दरअसल गुवाहाटी से 32 किमी. दूर छोटे से कस्बे में असम की तिवा जनजाति के लोग हर साल एक अनोखे व्यापारिक मेले का आयोजन करते हैं, जिसमें सारा लेनदेन सिर्फ और सिर्फ कैशलेस होता है।
विज्ञापन


मध्य असम और पड़ोसी मेघालय की जनजाति तिवा असम के मोरीगांव जिले में जनवरी के तीसरे हफ्ते में सालाना तीन दिवसीय मेले जुनबील का आयोजन करती है और इस समुदाय ने पांच से भी ज्यादा सदियों से वस्तु विनिमय व्यापार की व्यवस्था को बनाए रखा है। मेले का हाल ही में समापन हुआ है। 
विज्ञापन

15वीं सदी से हो रहा आयोजन

सर्बानंद सोनोवाल
इसमें शरीक होने वाले असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि तिवा लोगों के इस चलन से लोगों को सीखना चाहिए। इतिहासकारों के मुताबिक इस मेले का आयोजन 15वीं सदी से होता आया है।

सोनोवाल ने ऐलान किया कि इस मेले के लिए एक स्थायी भूखंड आवंटित किया जाएगा, जिससे कि भविष्य में भी इस मेले का आयोजन लगातार होता रहे तथा पर्यटन को बढ़ावा मिलता रहे, जिससे स्थानीय लोगों को लाभ होगा।

जुनबील मेला विकास समिति के सचिव जरसिंह बोरदोलोई ने बताया कि मेले के दौरान यहां बड़ा बाजार लगता है, जहां ये जनजातियां वस्तु विनिमय प्रणाली के जरिये अपने उत्पाद का आदान-प्रदान करती हैं। देश में अपनी तरह का यह संभवत: अनूठा मेला है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें