कोरोना ने जब दुनियाभर के बाजारों पर ताले लगवा दिए थे, तब सोने-चांदी की दुकानदारी खूब चली। बाजार में ऐसा माहौल बन रहा, जिससे दोबारा तेजी की उम्मीद है। इस बार चांदी की चमक ज्यादा रहेगी, जो निवेशक को तगड़ा रिटर्न दे सकती है। चांदी निवेश का बेहतर विकल्प क्यों साबित होगी, पूरा गणित बताती प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट-
चार साल की सुपर साइकिल दिलाएगी बंपर रिटर्न
मोडिटी विश्लेषक और केडिया एडवाइजरी के एमडी अजय केडिया का कहना है कि भारत सहित दुनियाभर के बाजारों में चांदी के लिए माहौल बन रहा है। किसी भी वित्तीय संकट के समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में कमोडिटी की सुपर साइकिल आती है।
2008 की मंदी में भी सोने-चांदी ने सुपर साइकिल का सामना किया, जिसका असर 2011 तक रहा। इससे पहले 1970-75, 1990-95, 2000-04 में भी वित्तीय संकट के समय कमोडिटी की सुपर साइकिल आई थी।
मौजूदा वित्तीय संकट में भी एक और सुपर साइकिल शुरू हो गई है, जो सोने-चांदी, कॉपर, अनाज सहित लगभग सभी कमोडिटीज में तेजी लाएंगे। चांदी अगस्त, 2020 में 77,000 रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा पहुंच गई थी। सुपर साइकिल औसतन 4-5 साल चलती है, जिसमें चांदी की चमक ज्यादा बढ़ने का अनुमान है।
लाख रुपये प्रति किलो तक जा सकते हैं 2023 तक चांदी के दाम
चांदी खरीद में इसलिए भी तेजी आएगी क्योंकि इसमें डिजिटल निवेश का कोई विकल्प नहीं है। सोने में आप गोल्ड बॉन्ड या ईटीएफ के जरिए निवेश करते हैं, जहां पैसा बंट जाता है। नेशनल स्पॉट एक्सचेंज चांदी में डिजिटल निवेश का विकल्प देता था, जो अब बंद हो चुका है।
चांदी के पक्ष में बन रहा माहौल
- 2011 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी के भाव 50 डॉलर प्रति औंस तक थे, जो अभी 26 डॉलर के आसपास हैं।
- दुनियाभर के देश अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए राहत पैकेज दे रहे। इससे मंहगाई बढ़ेगी, जिससे सोने और चांदी के भाव में तेजी आएगी।
- चांदी का सबसे ज्यादा उपयोग औद्योगिक इकाइयों में होता है, जहां चौतरफा सुधार आ रहा। यानी चांदी की खपत आने वाले समय में खूब बढ़ेगी।
- चांदी का उत्पादन 5 साल से लगातार घटता जा रहा, जो आने वाले समय में कीमतों को और ऊपर लेकर जाएगा।
- 5जी तकनीक और सोलर पैनल में चांदी का खूब उपयोग हो रहा, जो चांदी की खपत में इजाफा करेगा।
- नीचे जा रहा सोना और चांदी का अनुपात
- पिछले साल अनिश्चितता की वजह से सोने के भाव में तेजी थी, लेकिन उस अनुपात में चांदी के भाव नहीं चढ़े थे। अभी सोने-चांदी का अनुपात 67 के आसपास है।
- अगर 2011 जैसे हालात बनते हैं, जब ये अनुपात 31 तक आ गया था तो चांदी के भाव सुपर साइकिल के समय 2 लाख प्रति किलोग्राम के पार जा सकते हैं।
- मौजूदा सुपर साइकिल 2023 तक जाने की संभावना है। इस दौरान सोने के भाव 56-57 हजार रुपये प्रति किलोग्राम पहुंचते हैं तो 31 का अनुपात पूरा करने के लिए चांदी 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार जा सकती है।
सभी कमोडिटी में आ रही तेजी
शेयर बाजार अपने ऑलटाइम हाई पर जा चुका है। अगर कोरोना की दूसरी लहर प्रभावी होती है तो बाजार फिर टूटेगा। अभी कच्चे तेल, सोयाबीन, चना, तांबा सहित लगभग सभी कमोडिटी में 100% से 500% तक तेजी आ रही है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में सोने-चांदी के भाव फिर चढ़ेंगे, जिसमें चांदी के पक्ष में माहौल ज्यादा दिख रहा है। -संदीप जैन, निवेश सलाहकार