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Market : सोना, इक्विटी और डेट में निवेश का सही समय, 10 फीसदी से ज्यादा एक साल में रिटर्न दे सकता है भारतीय शेयर बाजार

Mon, 27 Jun 2022 05:19 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

एसेट क्लास यानी कई सारी संपत्तियों में निवेश करना एक चुनौतीपूर्ण काम होता है। निवेशक अक्सर यह सोच कर हैरान रह जाते हैं कि निवेश का निर्णय लेते समय किसी विशेष एसेट क्लास के लिए मूल्यांकन सस्ता है या महंगा। एक चुनौती यह भी आती है कि किसी विशेष एसेट क्लास में कब प्रवेश करें और कब बाहर निकलें।
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निवेश - फोटो : pixabay
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विस्तार
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एक प्रसिद्ध कहावत है- कभी भी सभी अंडों को एक टोकरी में नहीं रखना चाहिए। यही कहावत वित्तीय योजना बनाते समय भी लागू होती है। अगर आपके पास 100 रुपये हैं तो इसे अलग-अलग साधनों में लगाएं, ताकि अगर कोई जोखिम हो तो कम घाटा हो। इसी निवेश के विविधीकरण का गणित बताती अजीत सिंह की रिपोर्ट-

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इस समय सस्ते भाव पर उपलब्ध हैं अच्छे शेयर
राइट स्टैंडर्ड वेंचर्स एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर वकार नकवी कहते हैं कि एक आम निवेशक के लिए तभी निवेश करना सही समय होता है, जब निवेश का साधन सस्ते भाव में उपलब्ध हो। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कोई एक ऐसा फंड की योजना हो, जिसके जरिये कई जगह पर निवेश हो सके। चाहे वह सोना हो, शेयर हो या फिर डेट हो। यह ऐसे क्षेत्र हैं, जो अभी निचले स्तर पर हैं। इसलिए इनमें निवेश का सही समय है।

शेयर बाजार जहां उच्च स्तर से करीब 17 फीसदी टूट चुका है, वहीं सोना भी 56 हजार प्रति दस ग्राम के सार्वकालिक स्तर से 5 हजार गिरकर 51 हजार पर है। डेट में अब ब्याज दरें ऊपर जाने की ओर हैं। बैंकों ने सावधि जमा (एफडी) पर ब्याज बढ़ा दिया है। कंपनियों ने भी यही रास्ता अख्तियार किया है। इन तीनों क्षेत्रों का जो फिलहाल रुझान है, वह यह कि इनमें अगले एक साल में दो अंकों से ज्यादा का रिटर्न मिलने की उम्मीद है।
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असेट अलोकेशन आसान काम नहीं
एसेट क्लास यानी कई सारी संपत्तियों में निवेश करना एक चुनौतीपूर्ण काम होता है। निवेशक अक्सर यह सोच कर हैरान रह जाते हैं कि निवेश का निर्णय लेते समय किसी विशेष एसेट क्लास के लिए मूल्यांकन सस्ता है या महंगा। एक चुनौती यह भी आती है कि किसी विशेष एसेट क्लास में कब प्रवेश करें और कब बाहर निकलें। ऐसे में जब भी जरूरी हो, सही एसेट क्लास में निवेश करना और उसके बाद फिर से संतुलन स्थापित करना कोई आसान काम नहीं है।

चुनौतियों से निपटने में एसेट अलोकेटर फंड माहिर
आंकड़ों से पता चलता है कि एसेट क्लास (इक्विटी, डेट और सोना) की स्कीम जो निवेश करती है वह लंबे समय को ध्यान में रखकर करती है। एक आम आदमी यह निर्णय नहीं ले पाएगा कि वह कब शेयर, डेट या सोने में निवेश करे क्योंकि उसके पास इतना अनुभव नहीं होता है। लेकिन म्यूचुअल फंड की स्कीम के जो फंड प्रबंधक हैं, उनको इस काम में महारत हासिल होती है।
  • 10 साल में 4 गुना का रिटर्न : किसी ने मार्च, 2010 में निफ्टी में एकमुश्त 10 लाख रुपये का निवेश किया होगा तो वह 31 मई, 2022 तक 39.03 लाख रुपये हुआ है। इसी दौरान आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल की एसेट अलोकेटर स्कीम में भी यह निवेश 41.41 लाख रुपये हो गया है। इस दौरान स्कीम का शेयर में निवेश केवल 43 फीसदी था।
  • फंड ऑफ फंड का ढांचा : इस स्कीम में फंड ऑफ फंड का ढांचा है। यानी यह स्कीम किसी और फंड हाउस की योजना में निवेश करती है। खास बात यह है कि वैल्यूएशन मॉडल के आधार पर शेयर और डेट में निवेश 0 से 100 फीसदी हो सकता है। इसका मतलब जो भी सस्ते में मिलेगा, उसमें ज्यादा निवेश किया जाएगा।
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मार्च, 2020 में शेयर में निवेश 83 फीसदी
कोरोना की शुरुआत के दौरान मार्च, 2020 में शेयर बाजार में एसेट अलोकेटर का निवेश 83 फीसदी था। पर बाजारों में जैसे-जैसे तेजी आई, दिसंबर, 2020 तक यह निवेश घटकर 45 फीसदी हो गया। मई, 2022 तक यह केवल 33 फीसदी रह गया है। आगे जैसे-जैसे बाजार में सुधार होगा, इसमें और कमी आती जाएगी।

महंगाई से लड़ने में मदद करता है सोना
किसी भी निवेश में एसेट अलोकेशन की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। यह फंड आपके लक्ष्य को हासिल करने में मदद करता है। डेट निवेश में स्थिरता प्रदान करता है। जबकि सोना महंगाई से लड़ने में मदद करता है। शेयर बाजार लंबी अवधि में निवेशकों को एक औसत फायदा देता है। -पंकज मथपाल, सीईओ, आप्टिमा मनी मैनेजर्स
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