चुनौतियों से निपटने में एसेट अलोकेटर फंड माहिर
आंकड़ों से पता चलता है कि एसेट क्लास (इक्विटी, डेट और सोना) की स्कीम जो निवेश करती है वह लंबे समय को ध्यान में रखकर करती है। एक आम आदमी यह निर्णय नहीं ले पाएगा कि वह कब शेयर, डेट या सोने में निवेश करे क्योंकि उसके पास इतना अनुभव नहीं होता है। लेकिन म्यूचुअल फंड की स्कीम के जो फंड प्रबंधक हैं, उनको इस काम में महारत हासिल होती है।
- 10 साल में 4 गुना का रिटर्न : किसी ने मार्च, 2010 में निफ्टी में एकमुश्त 10 लाख रुपये का निवेश किया होगा तो वह 31 मई, 2022 तक 39.03 लाख रुपये हुआ है। इसी दौरान आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल की एसेट अलोकेटर स्कीम में भी यह निवेश 41.41 लाख रुपये हो गया है। इस दौरान स्कीम का शेयर में निवेश केवल 43 फीसदी था।
- फंड ऑफ फंड का ढांचा : इस स्कीम में फंड ऑफ फंड का ढांचा है। यानी यह स्कीम किसी और फंड हाउस की योजना में निवेश करती है। खास बात यह है कि वैल्यूएशन मॉडल के आधार पर शेयर और डेट में निवेश 0 से 100 फीसदी हो सकता है। इसका मतलब जो भी सस्ते में मिलेगा, उसमें ज्यादा निवेश किया जाएगा।
मार्च, 2020 में शेयर में निवेश 83 फीसदी
कोरोना की शुरुआत के दौरान मार्च, 2020 में शेयर बाजार में एसेट अलोकेटर का निवेश 83 फीसदी था। पर बाजारों में जैसे-जैसे तेजी आई, दिसंबर, 2020 तक यह निवेश घटकर 45 फीसदी हो गया। मई, 2022 तक यह केवल 33 फीसदी रह गया है। आगे जैसे-जैसे बाजार में सुधार होगा, इसमें और कमी आती जाएगी।
महंगाई से लड़ने में मदद करता है सोना
किसी भी निवेश में एसेट अलोकेशन की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। यह फंड आपके लक्ष्य को हासिल करने में मदद करता है। डेट निवेश में स्थिरता प्रदान करता है। जबकि सोना महंगाई से लड़ने में मदद करता है। शेयर बाजार लंबी अवधि में निवेशकों को एक औसत फायदा देता है। -पंकज मथपाल, सीईओ, आप्टिमा मनी मैनेजर्स