भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन बेहद निराशाजनक रहा। वैश्विक स्तर पर नकारात्मक रुझानों और निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। 8 जून 2026 के कारोबारी सत्र में 'रिस्क-ऑफ' (जोखिम से बचने) के माहौल के बीच प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम हो गए। इस बिकवाली ने न केवल भारतीय बाजार को अपनी चपेट में लिया, बल्कि एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी भारी उथल-पुथल मचा दी है।
बाजार में सुबह से ही बिकवाली का भारी दबाव देखा गया।
बाजार का सेक्टोरल दायरा काफी कमजोर रहा और निफ्टी के ज्यादातर इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
घरेलू बाजार में इस गिरावट का मुख्य कारण विदेशी बाजारों में मची भारी उथल-पुथल है। दुनिया भर के कई प्रमुख शेयर बाजारों में आज भारी गिरावट दर्ज की गई:
शेयर बाजार में इस भारी गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया में गहराता भू-राजनीतिक संकट एक मुख्य कारण है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, लेबनान में इजरायली कार्रवाई के जवाब में ईरान द्वारा इस्राइल पर मिसाइल दागे जाने से हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इस संघर्ष के कारण वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 3.51 प्रतिशत उछलकर 96.36 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से शांति वार्ता को बचाने के लिए जवाबी कार्रवाई न करने की अपील की है और ईरान को भी बातचीत की मेज पर लौटने को कहा है।
भू-राजनीतिक चिंताओं के साथ-साथ टेक शेयरों की 'एआई-आधारित रैली' का कमजोर पड़ना भी निवेशकों की घबराहट बढ़ा रहा है। अमेरिकी बाजार में शुक्रवार को नैस्डैक 4.18 प्रतिशत टूट गया, जिसका सीधा असर टेक-प्रधान एशियाई बाजारों पर पड़ा। लिवलॉन्ग वेल्थ के हरिप्रसाद के. के मुताबिक, दक्षिण कोरिया के 'कोस्पी' इंडेक्स में लगभग 8 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है, जिसके कारण वहां ट्रेडिंग तक रोकनी पड़ी। इसके अलावा, बाजार के आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 8,776.25 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी बिकवाली की है, जिसने घरेलू बाजार के मनोबल को और ज्यादा कमजोर कर दिया है।