भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की सलाह के बावजूद रविवार को पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ गए। पेट्रोल की कीमतों में 21 पैसे तो डीजल में 20 पैसे की बढ़ोतरी हुई। आरबीआई ने मौद्रिक नीति बयान में बढ़ती महंगाई के प्रति आगाह करते हुए केंद्र और राज्यों से पेट्रोल-डीजल पर कर और अधिभार कम करने की सलाह दी थी।
बयान में कहा गया था कि 2021-22 का महंगाई अनुमान बढ़ा दिया है। पेट्रोल और डीजल की महंगाई के कारण बढ़ते लागत के दबाव को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा उत्पाद शुल्क, अधिभार और करों को समायोजित करने की जरूरत है।
केंद्रीय बैंक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमोडिटी, खासकर कच्चे तेल के बढ़ते दाम और लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी से मुद्रास्फीति बढ़ने के जोखिम का अंदेशा जताया है। वहीं, ईंधन कीमतों में इस बढ़ोतरी के साथ दिल्ली में भी पहली बार एक लीटर पेट्रोल 95.09 रुपये और डीजल 86.01 रुपये हो गया है।
ईंधन के दाम 20वीं बार बढे़, छह राज्यों में पेट्रोल 100 के पार
पेट्रोल की कीमतें छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और लद्दाख में 100 रुपये के पार हो गई हैं। बीते चार मई के बाद से 20वीं बार की बढ़ोतरी में पेट्रोल 4.69 प्रति लीटर और डीजल 5.28 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बढ़ चुका है।
रिजर्व बैंक ने बताई यह वजह
पेट्रोल की कीमत मुंबई व भोपाल जैसे शहरों में 100 के पार पहुंच चुकी हैं। दिल्ली में दाम लगभग 95 रुपये प्रति लीटर हैं। रिजर्व बैंक ने तेल के दामों में उछाल पर लगाम के लिए सुझाव दिए हैं। बैंक के अनुसार मूल्यवृद्धि की मुख्य वजह केंद्र और राज्यों द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए जाने वाले टैक्स हैं।
टीपीपी फॉर्मूले से तय होते हैं दाम
पंपों पर ग्राहकों को बेचे जाने वाले तेल की कीमत ट्रेड पैरिटी प्राइसिंग (टीपीपी) फॉर्मूले से तय होती है। इसका 80:20 का अनुपात रहता है। यानी देश में बेचे जाने वाले पेट्रोल-डीजल के मूल्य का 80 प्रतिशत हिस्सा विश्व बाजार में वर्तमान में बेचे जा रहे ईंधन के दामों से जुड़ा होता है। शेष 20 फीसदी हिस्सा अनुमानित मूल्य के अनुसार जोड़ा जाता है। जानकारों का कहना है कि भारत में कच्चे तेल के शोधन और मार्केटिंग की लागत का पंपों पर ईंधन के असल दामों से कोई लेना-देना नहीं है।