नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया ने बाजार नियामक सेबी के साथ अपने कानूनी विवाद को निपटाने के लिए नियामक को 13.88 अरब रुपये यानी 1388 करोड़ रुपये (160 मिलियन डॉलर) का भुगतान करने की पेशकश की है। एनएसई ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि वह लंबे समय से टल रहे अपने आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) को लाने की दिशा में आगे बढ़ सके। रॉयटर्स के अनुसार मामले से जुड़े तीन सूत्रों ने एनएसई के इस कदम की पुष्टि की है। एनएसई की ओर से पेश राशि भारत के इतिहास में बाजार नियामक के साथ किया गया सबसे बड़ा समझौता है।
एनएसई 2019 से सेबी के साथ मुकदमेबाजी में है उलझा
भारत का सबसे बड़ा एक्सचेंज और दुनिया का सबसे सक्रिय डेरिवेटिव एक्सचेंज एनएसई 2019 से भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ मुकदमेबाजी में उलझा हुआ है। नियामक ने एक्सचेंज पर अपने सभी व्यापारिक सदस्यों को समान पहुंच प्रदान करने में विफल रहने के आरोपों के बाद 11 अरब रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
मामले से जुड़े दो सूत्रों के अनुसार, एनएसई और सेबी अदालत के बाहर समझौते के लिए बातचीत कर रहे हैं। एक सूत्र ने बताया कि नियामक तीन महीने के भीतर एक्सचेंज को यह प्रमाणपत्र दे सकता है कि उसे आईपीओ पर कोई आपत्ति नहीं है। एक अन्य सूत्र ने कहा, "यदि सब कुछ अपेक्षित समयसीमा के अनुसार हुआ तो एनएसई का आईपीओ अगले वर्ष मई से पहले बाजार में आ सकता है।"
रॉयटर्स के अनुसार, हालांकि इस मामले में एनएसई ने फिलहाल टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सेबी की ओर से भी अब तक इस मामले में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं हा गया है। नकदी से समृद्ध मुंबई मुख्यालय वाला एनएसई 2016 से ही अपने कुछ सबसे बड़े निवेशकों को बाहर निकालने के लिए सूचीबद्ध होने की कोशिश में जुटा है। लेकिन नियामक की जांच और फिर जुर्माने के कारण इस प्रक्रिया को रोक दिया गया था।
एनएसई के बड़े निवेशकों में एलआईसी और एसबीआई भी शामिल
एनएसई ने जुर्माने को अदालत में चुनौती दी, जिसने सेबी के आदेश के कुछ हिस्सों को अलग रखने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ नियामक ने बाद में देश की शीर्ष अदालत में अपील की थी। एनएसई के सबसे बड़े निवेशकों में भारतीय जीवन बीमा निगम शामिल है। इसकी एनएसई में 10.72% हिस्सेदारी है। इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक की 7.76% हिस्सेदारी है। मॉर्गन स्टेनली के पास 1.58% तथा कनाडा पेंशन निवेश योजना बोर्ड के पास 1.60% हिस्सेदारी है।
एनएसई की मुख्य घरेलू प्रतिद्वन्द्वी बीएसई लिमिटेड 2017 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई। दो सूत्रों ने बताया कि सेबी अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने से पहले एक्सचेंज की प्रणालियों और प्रक्रियाओं का निरीक्षण कर रहा है। सेबी ने फरवरी में एनएसई को पत्र लिखकर एक्सचेंज की आंतरिक प्रक्रियाओं के बारे में चिंता जताई थी। इनमें प्रबंधन की नियुक्ति और पारिश्रमिक, अध्यक्ष की नियुक्ति में विफलता और प्रौद्योगिकी की कमी शामिल थी। दो सूत्रों ने बताया कि यदि नियामक की ओर से इस समझौते को स्वीकार कर लिया जाता है तो इसके लिए भारत के शीर्ष न्यायालय की मंजूरी की आवश्यकता होगी।