राज्यों के वित्त मंत्रियों द्वारा मंगलवार को मंजूर किए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के मॉडल कानून के अनुसार ऑनलाइन खरीदी जाने वाली सभी वस्तुओं पर एकसमान दर से जीएसटी लगेगा। अगले साल अप्रैल से इसके प्रभावी होने की संभावना है।
स्थानीय शुल्कों के बदले जीएसटी वित्तीय लेनदेन के पहले स्थान पर लगाया जाएगा। इससे ई-कॉमर्स क्षेत्र में जीएसटी लागू होने की स्थिति स्पष्ट होती है। ई-कॉमर्स में ऐसे लेनदेन भी होते हैं जहां सामान किसी एक राज्य में बेचा जाता है लेकिन उसकी खरीदारी दूसरे राज्य में की जाती है।
राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि मंगलवार को कोलकाता में हुई बैठक में राज्य के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति ने मॉडल जीएसटी कानून को मंजूरी दे दी है। अधिया ने ट्वीट कर कहा, ‘हम सभी साझेदारों से आग्रह करते हैं कि वे अपने सुझाव/टिप्पणी वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति के सचिवालय और/या वित्त मंत्रालय को दें।’
मॉडल जीएसटी कानून के प्रावधान
मॉडल जीएसटी कानून में 162 धाराएं और चार शेड्यूल हैं। मॉडल कानून में सिफारिश की गई है कि अगर कोई व्यक्ति या संस्थान कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो उसे पांच साल की जेल हो। इसमें प्रत्येक राज्य में अथॉरिटी फॉर एडवांस्ड रूलिंग (एएआर) बनाने की बात कही गई है।
इसके अलावा, मॉडल कानून में प्रत्येक राज्य में अपीलीय प्राधिकरण स्थापित करने का प्रावधान भी किया गया है। अपीलीय प्राधिकरण में सीजीएसटी के मुख्य आयुक्त और एसजीएसटी के आयुक्त शामिल होंगे। जीएसटी के मॉडल कानून में प्रकल्पित कराधान योजना की तर्ज पर कंपोजीशन लेवी का प्रावधान किया गया है।
इसके अनुसार, अगर किसी एक राज्य में कोई व्यक्ति वस्तु एवं सेवाओं की बिक्री से 50 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर पर कम से कम एक फीसदी कर लगाया जाएगा। 10 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर पर जीएसटी लगाया जाएगा। हालांकि, सिक्किम सहित पूर्वोत्तर में यह सीमा पांच लाख रुपये होगी।
मॉडल कानून में उपभोक्ता कल्याण कोष बनाने का प्रावधान
जीएसटी के मॉडल कानून में उपभोक्ता कल्याण कोष बनाने का प्रावधान किया गया है। इसका इस्तेमाल केंद्र और राज्य सरकारें उपभोक्ताओं के कल्याण के लिए करेंगी।