देश में गेहूं की उपलब्धता बेहतर करने के लिए सरकार ने गेहूं आयात को शुल्क मुक्त कर दिया है। पहले गेहूं आयात पर 10 फीसदी शुल्क था। ऐसा गेहूं की बढ़ती कीमतों को देखते हुए किया गया। दूसरी ओर मौसम विभाग ने भी इस बार कम सर्दी रहने का अनुमान जताया है, जिससे 2016-17 की गेहूं की फसल प्रभावित हो सकती है।
गेहूं पर से आयात शुल्क हटाए जाने की अधिसूचना वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में पेश की। उन्होंने कहा कि 8 दिसंबर, 2016 की अधिसूचना के मुताबिक, गेहूं पर से आयात शुल्क तत्काल प्रभाव से 10 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया गया है।
इसकी कोई अंतिम तिथि नहीं है। इसके लिए 17 मार्च, 2012 की अधिसूचना को संशोधित किया गया है। उपभोक्ता मामलों के सचिव हेम पांडे ने इस कदम का स्वागत किया और कहा कि इससे गेहूं की घरेलू उपलब्धता बेहतर होगी और गेहूं से बने उत्पादों जैसे गेहूं के आटा की बढ़ती कीमतें नियंत्रित होंगी।
वहीं सरकार के इस कदम का कांग्रेस और जदयू ने विरोध किया और इस फैसले को किसान विरोधी और एक साजिश बताया। निजी कारोबारी अब तक 17.2 लाख टन गेहूं का आयात कर चुके हैं और इस साल कुल आयात के 20 लाख टन का आंकड़ा पार कर जाने की उम्मीद है।