मजबूत मांग के कारण वायदा कारोबार में शुक्रवार को सोना-चांदी के दामों में बढ़त देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने के अनुबंध की कीमत 641 रुपये या 0.6 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,07,058 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।
वहीं मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में चांदी के दिसंबर डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 860 रुपये व 0.69 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,24,780 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। विश्लेषकों ने कहा कि प्रतिभागियों द्वारा ताजा सौदे करने से चांदी की कीमतों में तेजी आई।
वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में दिसंबर डिलीवरी के लिए कॉमेक्स सोना वायदा 0.31 प्रतिशत बढ़कर 3,557.02 डॉलर प्रति औंस हो गया। वहीं न्यूयॉर्क में चांदी 0.47 प्रतिशत बढ़कर 40.86 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
कमोडिटी बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और भारत में त्योहारी मांग की संभावनाओं के बीच सर्राफा की कीमतें ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रही हैं।
ऑग्मोंट की अनुसंधान प्रमुख रेनिशा चैनानी ने कहा कि इन अतिरिक्त अनिश्चितताओं से सोने और चांदी को समर्थन मिलता रहा। इसमें ऋण और फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं भी शामिल थीं।
अगस्त महीने के अंत में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी आई। यह चार प्रतिशत बढ़कर 3,429 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। अगस्त के अंत तक, इस साल सोने की कीमतों में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
गोल्ड रिटर्न एट्रिब्यूशन मॉडल का हवाला देते हुए, रिपोर्ट बताती है कि अगस्त के मूल्य प्रदर्शन में महीने की शुरुआत में अमेरिकी डॉलर में गिरावट, जारी भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत वैश्विक गोल्ड ईटीएफ प्रवाह का प्रमुख योगदान रहा। हाल ही में, सितंबर में ब्याज दरों में कटौती की अधिक संभावना ने भी इसमें भूमिका निभाई है।
गोल्ड ईटीएफ प्रवाह ने, विशेष रूप से महीने के अंत में, भरपूर समर्थन प्रदान किया। इसमें 5.5 अरब डॉलर का अंतर्वाह दर्ज किया गया। इसमें 4.1 अरब डॉलर के साथ उत्तरी अमेरिका और 1.9 अरब डॉलर के साथ यूरोप का प्रभुत्व रहा, जबकि एशिया और अन्य क्षेत्रों से बहिर्वाह देखा गया।