अमेरिकी फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को बर्खास्त करने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद फेड की स्वतंत्रता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोने की ओर रुख किया। इससे राष्ट्रीय राजधानी में गुरुवार को पीली धातु का भाव 300 रुपये बढ़कर 1,01,570 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया।
व्यापारियों का कहना है कि कमजोर अमेरिकी डॉलर, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती की उम्मीद, तथा टैरिफ संबंधी मौजूदा घटनाक्रमों के कारण कीमतों में तेजी आई है। पिछले बाजार सत्र में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली यह बहुमूल्य धातु 1,01,270 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी।
स्थानीय बाजार में 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना गुरुवार को 200 रुपये बढ़कर 1,01,000 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया। बुधवार को यह 1,00,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। गुरुवार को चांदी की कीमतें 1,20,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर स्थिर रहीं।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (कमोडिटीज) सौमिल गांधी ने कहा, "अमेरिकी डॉलर में गिरावट और सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की जारी मांग के कारण गुरुवार को सोने की कीमतों में तेजी आई। बाजार प्रतिभागी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लिसा कुक को बर्खास्त करने की वैधता पर चर्चा कर रहे हैं।"
ट्रम्प और फेडरल रिजर्व गवर्नर लिसा कुक के बीच लड़ाई तब बढ़ गई जब कुक के वकील ने कहा कि वह ट्रम्प प्रशासन पर मुकदमा करेंगी ताकि उन्हें बर्खास्त करने के उनके प्रयास को रोका जा सके। अमेरिकी केंद्रीय बैंक ट्रम्प की अप्रत्याशित टैरिफ नीतियों के कारण मुद्रास्फीति की आशंका का हवाला देते हुए 2024 के अंत से दरों को स्थिर रख रहा है।
गांधी ने कहा कि यह मुकदमा अमेरिकी केंद्रीय बैंक पर व्हाइट हाउस के अधिकार की सीमा को स्पष्ट करेगा। उन्होंने कहा कि फेड की स्वतंत्रता के बारे में उठी चिंताओं के बीच सोने की कीमतों में इजाफा दिखा है।