जब रुपये में गिरावट शुरू हुई और यह 60 रुपये प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी पार कर गया तो नरेंद्र मोदी ने तंज भरे लहजे में टिप्पणी की थी कि भारत के प्रधानमंत्री अर्थशास्त्री हैं, इसके बावजूद देश की अर्थव्यवस्था इतनी बुरी स्थिति में है। बहुत जल्द डॉलर की दर वित्त मंत्री पी चिदंबरम की उम्र तक पहुंच जाएगी। चिदंबरम उस समय 68 वर्ष के थे।
इतिहास एक बार फिर से मोदी के सामने खुद को दोहरा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब विकास और आर्थिक मोर्चे पर कड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, क्योंकि जोरदार बहुमत के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था को खराब स्थिति से बाहर निकालने को लेकर सरकार की क्षमता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में लगातार गिरावट बृहस्पतिवार को 64.28 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गई। संयोग से मोदी 64 वर्ष की आयु के हैं और 7.5 फीसदी जीडीपी ग्रोथ के दावों के बावजूद शर्मिंदगी साफ तौर पर दिख रही है।
भारत के पास डॉलर का बेहतर भंडार होने के बावजूद रुपया कहर ढा रहा है। बृहस्पतिवार को रुपया 64 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर 20 माह के न्यूनतम स्तर तक पहुंच गया। रुपया सितंबर, 2013 में इस स्तर के आसपास पहुंचा था।
दिन के निचले स्तर की बात करें तो रुपया 64.28 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था। यह बुधवार को बंद हुए 63.54 रुपये प्रति डॉलर की तुलना में 74 पैसे अथवा 1 फीसदी नीचे आया है।
चीन की तरफ मुड़ रहे निवेशक
विशेषज्ञों का कहना है कि इक्विटी में लगातार पूंजी बाहर जाने से रुपये पर दबाव बढ़ा है। रुपया 2014 में उभरते बाजार में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा थी।
इसी तरह से विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा बिकवाली रुकने का नाम नहीं ले रही है। माना जा रहा है कि पिछले 14 सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने कुल 13,500 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। वे डेट मार्केट में भी बिकवाली कर रहे हैं।
ऐसा लग रहा है कि एफआईआई पिछले वर्षों के दौरान हुए कैपिटल गेन पर मिनिमत ऑल्टरनेट टैक्स की मांग करने वाले कर नोटिस पर भारत से पैसा निकाल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एफआईआई अब चीन की तरफ मुड़ रहे हैं। साथ ही, निवेशक वियतनाम की तरफ भी नजरें गड़ाए बैठे हैं।
बेचे 13 हजार करोड़ के शेयर
एफआईआई 2015 में अब तक भारत के इक्विटी बाजार में निवेश करते रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मई में एफआईआई ने इक्विटी में 3,467 करोड़ की बिकवाली की है।
आंकड़ों से पता चलता है कि बीते पखवाड़े एफआईआई ने 13,110 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। समान अवधि में प्रमुख सूचकांक बीएसई का सेंसेक्स और एनएसई का निफ्टी 9 फीसदी तक गिरावट का शिकार हो चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कॉरपोरेट की कमजोर आय, सुधारों को धीमी गति से लागू करने, पिछले छह माह में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 40 फीसदी की उछाल के साथ इसका 69 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचना, यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी कुछ ऐसे कारक रहे हैं, जिन्होंने बाजार की धारणा को कमजोर किया है।