आभूषण निर्माताओं पर बजट में एक फीसदी उत्पाद शुल्क लगाने के फैसले से छोटे ज्वेलर्स प्रभावित नहीं होंगे। यह सिर्फ आभूषण के बड़े निर्माताओं के लिए है। जॉब वर्क करने वाले छोटे ज्चेलर्स को उत्पाद शुल्क नहीं देना होगा और उन्हें इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराना होगा।
यही नहीं, चांदी के आभूषणों को इसके दायरे से दूर रखा गया है। बजट के इस प्रावधान के विरोध में पिछले दो मार्च से हड़ताल कर रहे आभूषण निर्माताओं ने एक ओर आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी है तो दूसरी तरफ वित्त मंत्रालय ने इससे निपटने के लिए अलग ही रणनीति तैयार की है।
राजस्व विभाग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि केन्द्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के सभी कमिश्नरों के पास इस बारे में विस्तृत जानकारी भेजी गई है ताकि वे अपने स्तर पर लोगों को इस बारे में जागरूक कर सकें।
उनके पत्र में इस बात को विशेष रूप से बताया गया है कि जॉब वर्क करने वाले स्वर्णकारों को न तो उत्पाद शुल्क विभाग में रजिस्ट्रेशन कराने को कहा जाएगा और न ही उन्हें उत्पाद शुल्क का भुगतान करना होगा। यह सब जिम्मेदारी उन बड़े निर्माताओं की होगी, जो कि जॉब वर्क कराते हैं। दूसरे उद्योग में भी इसी तरह से काम होता है।
चांदी के आभूषण निर्माताओं पर नहीं लगेगा यह कर
पटियाला ज्वैलरों ने निकाला रोष मार्च
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उत्पाद शुल्क विभाग के फील्ड में तैनात एक अधिकारी ने बताया कि वह अपने स्तर पर लोगों को इस बारे में जागरूक कर रहे हैं। उनके मुताबिक काले धन पर लगाम लगाने के लिए ऐसे प्रावधान किये जा रहे हैं क्योंकि रीयल एस्टेट के बाद यही ऐसा क्षेत्र है, जहां काला धन खपता है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर में हुए सख्त प्रावधानों की वजह से अब रीयल एस्टेट में काला धन खपाना कठिन हो गया है।
इसके बाद सरकार ने आभूषण के क्षेत्र में सुधार शुरू किया है। मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि इसके लिए आभूषण करोबारियों को कतई तंग नहीं किया जाएगा। इस बाबत फील्ड अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश भेजा गया है। यही नहीं, उन्हें कारोबारियों के परिसर का दौरा करने से भी रोका गया है।
चांदी का आभूषण बनाने वालों की आशंका को समाधान करते हुए कहा गया है कि चांदी के आभूषणों पर यह कर तब तक नहीं लगेगा जब तक कि उसमें हीरा, रूबी, नीलम, मणि-माणिक्य आदि कीमती पत्थर नहीं जड़ते हैं।
उन्होंने बताया कि आभूषण निर्माताओं को यह भी भ्रम है कि उन्हें हर निकासी पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क चुकाना होगा जबकि ऐसी बात नहीं है। उन्हें हर महीने के लिए मासिक आधार पर कर का भुगतान करना होगा। जैसे मार्च 2016 के लिए कर की पहली किस्त 31 मार्च 2016 तक जमा करनी होगी। आभूषण कारोबारी बीते 2 मार्च से ही इसके विरोध में हड़ताल पर हैं।