भारत की ईंधन को लेकर मांग में 65 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अगले महीने तक यह कोरोना वायरस से पहले वाली स्थिति में पहुंच जाएगा। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस बारे में जानकारी दी है। मंत्री ने कहा कि सरकार के आर्थिक पैकेज की घोषणा और कोरोना प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद से आर्थिक गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ना शुरू कर दिया है।
प्रधान ने कहा कि दुनिया ने ईंधन की मांग में अभूतपूर्व गिरावट देखी है। कई देशों ने रिफाइनरियों को बंद कर दिया, योजनाओं को पुनर्निर्धारित किया गया। भारत ने इसकी तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।
उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की शुरुआत (25 मार्च) के बाद से, ईंधन की मांग में 30 से 35 फीसदी की गिरावट देखी गई। यह गिरावट अप्रैल 2019 में हुई गिरावट के समान थी। फिर भी, प्रमुख उत्पादन क्षमताएं चालू रहीं। इस तरह मांग बढ़कर 65 फीसदी पर आ गई, जो मई 2019 के स्तर के बराबर है और जून महीने तक यह प्री-कोरोना (कोरोना वायरस के पहले की स्थिति) स्तर पर पहुंच जाएगी।
आईएसएस मार्केट की रिपोर्ट के अनुसार, इसकी तुलना चीन की ईंधन खपत से करने पर पता चलता है कि वहां भी प्री-कोरोना के बाद मांग में बढ़ोतरी देखी गई है। चीन दुनिया में तेल का दूसरे सबसे बड़ा उपभोक्ता है। चीन में फरवरी महीने में तेल की खपत घटकर 40 फीसदी पर पहुंच गई थी। वहीं, अब इसमें बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह बढ़कर 90 फीसदी पर पहुंच गई है।
ईंधन की मांग में पहले जैसी स्थिति दर्शाती है कि लोग फिर से काम पर जा रहे है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा बाजार वैश्विक मांग केंद्र के रूप में अपना स्थान हासिल करने के लिए तैयार है।
मंत्री ने कहा कि इस पैटर्न (तेल उपभोक्ता में दर्ज हुई बढ़त) में बदलाव हो सकता है। आवागमन करते समय सामाजिक दूरी और सुरक्षा बनाए रखने के लिए दुपहिया वाहन एक किफायती विकल्प के रूप में देखे जाएंगे। छोटी कारों के साथ भी ऐसा ही होगा।
उन्होंने कहा कि इससे पेट्रोल की मांग में तेजी आएगी। बढ़ते हाईवे ट्रैफिक, ट्रेन सेवा और कृषि क्षेत्र की गतिविधियों को फिर से शुरू होने से डीजल की बिक्री भी बढ़ेगी। 25 मई से उड़ान शुरू होने के बाद एविएशन फ्यूल को भी बढ़ावा मिलेगा।