एक चौंकाने वाले कदम के तहत चीन ने मंगलवार को अपनी मुद्रा युआन का दो फीसदी अवमूल्यन कर दिया। इसके बाद दुनियाभर के शेयर बाजारों में असर दिखायी दिया।
1994 के बाद एक दिन में चीनी मुद्रा में आई यह सबसे भारी कमी है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर शुमार चीनी अर्थव्यवस्था इस वक्त मंदी से और घटते निर्यात से जूझ रही है।
'पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना' ने अब एक डॉलर की कीमत 6.22298 युआन तय की है जो इससे पहले 6.1162 युआन थी। बैंक के मुताबिक युआन के मूल्य में 1.9 प्रतिशत की इस कमी का मकसद विनिमय दर को और अधिक 'बाजार के मुताबिक' बनाना है।
पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना एक आधिकारिक मध्यबिंदु (मिडप्वाइंट) के जरिए इस दर को नियंत्रित करती है जिससे किसी भी निश्चित दिन में कारोबार दो प्रतिशत उठ या गिर सकता है।
विदेशों में निर्यात बढ़ेगा
सस्ती चीनी मुद्रा से चीन का निर्यात भी सस्ता होगा, इससे विदेशों में निर्यात बढ़ेगा। तीन दशकों से चीन के जबरदस्त विकास का यही मंत्र रहा है। लेकिन इसमें हाल में कमजोरी के संकेत दिखाई पड़ रहे हैं।
चीन ने 1994 में गिरावट के लिए अधिकारियों और बाजार दरों को दोषी बताया था। अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव बाजार में जारी बदलाव को संभालने में मदद करेगा।
यह अवमूल्यन कमजोर विकास दर पर चीनी सरकार की चिंता को रेखांकित करता है। चीन को लगता है कि मुद्रा की कमजोर कीमत उसका निर्यात बढ़ाने में मदद देगी।
भारत समेत दुनिया भर के बाजार पर दिखा असर
चीनी मुद्रा में दो फीसदी की भारी कमी का असर एशिया समेत दुनिया भर के शेयर बाजार पर पड़ा।
भारत की बात करें तो बीएसई का सेंसेक्स 120.70 अंक लुढ़ककर एक सप्ताह बाद 28 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 27,745.39 अंक पर पहुंच गया है।
वहीं एनएसई का निफ्टी 54.15 अंक गिरकर 8500 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 8,408.20 पर कारोबार कर रहा है।
साथ ही जापान का निक्की 1.10 प्रतिशत, हांगकांग का हैंगसैंग 1.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं।