प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक में सोने को लेकर दो बड़े फैसले किए गए। घर, मंदिर व अलमारी में रखे सोने को निकाल कर बैंक में जमा करने पर ब्याज देने से जुड़ी गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को मंजूरी दी गई।
वहीं सॉवरन गोल्ड बांड स्कीम को भी हरी झंडी मिल गई। इसके तहत कोई भी व्यक्ति सरकार से गोल्ड सर्टिफिकेट खरीद पाएगा। उस सर्टिफिकेट के बदले उसे सालाना ब्याज मिलेगा और बाद में उस सर्टिफिकेट या बांड के बदले वह नकद हासिल कर सकता है या फिर उस मूल्य का सोना भी ले सकता है।
ब्याज की दर क्या होगी यह भारतीय रिजर्व बैंक तय करेगा। गोल्ड बांड भारत सरकार के नाम पर जारी किया जाएगा और बांड की पूरी गारंटी भारत सरकार लेगी। सोने की कीमत के आधार पर ब्याज मिलेगा।
सोने का आयात होगा कम
गोल्ड बांड जारी करने से बाजार में सोने की मांग में कमी आएगी और इससे सोने का आयात भी कम होगा, जिससे सरकार की विदेशी मुद्रा बचेगी।
वहीं गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के लागू होने पर सरकार के पास सोने का भंडार बढ़ेगा और सोने के लिए आयात पर निर्भरता में कमी आएगी। एक अनुमान के मुताबिक भारत में 20,000 टन सोने का ऐसा स्टॉक है, जिसका कारोबार में कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
बुधवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि आम आदमी से लेकर मंदिर, ट्रस्ट और बड़े बिजनेसमैन गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में निवेश कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे बेकार पड़ा सोना बैंकिंग सिस्टम में आएगा, जिसका लाभ देश को होगा। वहीं, लोगों को सोना जमा करने के बदले ब्याज मिलेगा। यह शार्ट, मीडियम और लांग टर्म के लिए होगा।
5-7 साल के होंगे ये बांड
जेटली ने कहा कि सॉवरेन गोल्ड बांड का उद्देश्य फिजिकल गोल्ड की डिमांड कम करना है। यह बांड 5 से 7 साल की अवधि के होंगे। केवल भारतीय कंपनियां सॉवरेन गोल्ड बांड खरीद सकेंगी। गोल्ड बांड प्लान में कोई भी इकाई 500 ग्राम से अधिक गोल्ड नहीं खरीद सकती है।
इस बांड पर ब्याज दर का फैसला समय-समय पर किया जाएगा। ब्याज का भुगतान सरकार की तरफ से अधिकृत डाकघर, बैंक व गैर वित्तीय संस्था में किया जाएगा।
गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के तहत सोने की ईंट, सोने का बार और सोने के सिक्के जमा करने की छूट होगी। ऐसा कहा जा रहा है कि 500 ग्राम तक सोना जमा करने के लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं होगी।
लेकिन 500 ग्राम से अधिक सोना जमा करने पर सोना खरीदने की रसीद व पैन नंबर देना अनिवार्य किया जा सकता है। मंदिर और ट्रस्ट से की तरफ से सोना जमा करने पर सेल्फ सर्टिफिकेशन की जरूरत होगी।
क्या है सरकार का मकसद?
- लोगों के घरों में रखा हजारों टन सोना देश की आर्थिक व्यवस्था के उपयोग में लाना
- सोने की धातु की खरीददारी को कम करना ताकि देशहित में उपयोग किया जा सके
कैसे मिलेगा गोल्ड बांड का लाभ
- सोने की धातु के स्थान पर गोल्ड बांड खरीदने पर सरकार तय करेगी ब्याज
- बैंकों, डाकघरों और गैर बैंकिंग कंपनियों के जरिए खरीदे जा सकते हैं बांड
- एक व्यक्ति 2, 5, 10, 50 व 100 ग्राम के 500 ग्राम तक बांड प्रतिवर्ष खरीद सकता है
- गोल्ड बांड का मैच्योरिटी समय पांच से सात साल तक रहने की संभावना
घर का सोना बैंकों को दें, ब्याज लें
- घर या लॉकरों का सोना बैंकों में जमा कर बदले में ब्याज कमा सकते हैं
- छोटी या मध्यम अवधि में सोना वापस मिलने का विकल्प भी मौजूद
- लंबे समय तक सोने से ब्याज कमाने के लिए ग्राहकों के पास विकल्प
- सोने को बैंकों या संबंधित अधिकृत एजेंटों के पास जमा करा सकते हैं