प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष महेंद्र देव ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक 'विकसित भारत' बनने के लिए 7 से 8 फीसदी की निरंतर आर्थिक वृद्धि दर चाहिए। यह लक्ष्य निजी क्षेत्र के निवेश और मजबूत निर्यात वृद्धि पर बहुत अधिक निर्भर करता है। देव ने 23 जून को एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए यह बात कही।
महेंद्र देव ने साफ किया कि आत्मनिर्भर भारत का मतलब आयात प्रतिस्थापन नहीं है। इसका उद्देश्य घरेलू प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना है। इससे उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
कृषि क्षेत्र में पारंपरिक रासायनिक इनपुट से दूर जाना एक प्रमुख नीतिगत फोकस है। सरकार जैविक और प्राकृतिक खेती जैसी वैकल्पिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना चाहती है। इसका उद्देश्य उर्वरक सब्सिडी के कुल उपभोग और राजकोषीय बोझ को कम करना है।
वैश्विक कमोडिटी बाजारों में हालिया बदलावों से कुछ राजकोषीय राहत मिली है। अंतरराष्ट्रीय यूरिया की कीमतें 900 डॉलर से घटकर 450 डॉलर हो गई हैं। इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ कम होगा।
देव ने वर्तमान खाद्य भंडार पर विश्वास व्यक्त किया। भारत के पास दालों का पर्याप्त भंडार है। यह घरेलू खाद्य मुद्रास्फीति को बढ़ने से रोकेगा।
हालांकि, बाहरी कारक अभी भी आर्थिक दृष्टिकोण के लिए जोखिम पैदा करते हैं। पश्चिम एशिया युद्ध और अल नीनो के कारण चुनौतियां हैं। देव भारतीय रिजर्व बैंक के 6.6 फीसदी वृद्धि और 5.1 फीसदी मुद्रास्फीति के अनुमानों से सहमत हैं।