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ईएमआई घटने के लिए अभी करना होगा इंतजार

Thu, 07 Apr 2016 04:10 AM IST
शिशिर चौरसिया/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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रेपो रेट घटने केबावजूद उपभोक्ताओं को अपने घर, कार या पर्सनल लोन का ईएमआई घटने के लिए अभी कुछ दिन और इंतजार करना होगा। बैंक अधिकारियों का कहना है कि लोन केलिए ब्याज की गणना के लिए इसी महीने की पहली तारीख से अपनायी गई नई पद्घति की वजह से महीने के बीच में ऐसा नहीं हो सकता है।
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इसलिए इएमआई कटौती अगले महीने की पहली तारीख को ही हो सकेगी। जिन्होंने इसी महीने लोन लिया है, उसकी ईएमआई तो एक साल बाद बदलेगी।

सार्वजनिक क्षेत्र केएक अग्रणी बैंक के अधिकारी ने बताया कि रिजर्व बैंक के निर्देश पर इसी 1 अप्रैल से बैंकों ने लोन के लिए ब्याज गणना की नई पद्घति अपनायी है। इसमें कोष जुटाने के आई औसत लागत को ब्याज का आधार बनाया जाता है। इसी वजह से पुराने बेस रेट के मुकाबले नई पद्घति में पिछले सप्ताह ही लेंडिंग रेट घटाई गई है।

उल्लेखनीय है कि बैंकों ने 1 अप्रैल 2016 से कोष जुटाने की सीमांत लागत -एमसीएलआर- केआधार पर लेंडिंग रेट तय करना शुरू किया है। लोन का ब्याज दर तय करने को कहा गया था।
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एक अन्य बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ दिन पहले ही एमसीएलआर केआधार पर नया लेंडिंग रेट घोषित किया है। इस पद्घति में हर महीने की पहली तारीख को नई लेंडिंग रेट घोषित की जाती है।

नई दर घोषित करने केलिए किसी भी महीने के अंतिम सप्ताह केदौरान कोष जुटाने की लागत का औसत निकाला जाता है। अभी तो कोष जुटाने की दर वही है जो कि पिछले महीने के अंतिम सप्ताह में थी, क्योंकि जमा दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

यदि रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में कटौती के अनुरूप जमा दर में बदलाव किया जाता है तो भी महीने के बीच में एमसीएलआर में बदलाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने रिजर्व बैंक के ही निर्देश के हवाले से बताया कि उसमें रोज-रोज नहीं बल्कि महीने में एक बार एमसीएलआर में बदलाव करने को कहा गया है।

यही नहीं, इस प्रणाली में यह भी प्रावधान है कि एक बार लोन लेने पर एक साल बाद ही ब्याज दर बदलेगा। मतलब, जिन्होंने इसी महीने लोन लिया है, उनकी ब्याज दरें अगले साल अप्रैल में बदलेगी। 

यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान बैंको का लेंडिंग रेट बेस रेट से तय होता था। इस प्रणाली में रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में कटौती के बावजूद बैंक द्वारा लेंडिंग रेट में कटौती की बाध्यता नहीं थी। तभी तो जनवरी 2015 से अभी तक रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में 150 बेसिस प्वाइंट की कटौती की जा चुकी है जबकि बैंकों ने लेंडिंग रेट में 60 से 80 बेसिस प्वाइंट की ही कटौती की है।
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