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बट्टे खाते में बैंकों के 1.14 लाख करोड़, डूबी पूरी रकम

Sun, 06 Mar 2016 04:38 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली

सार

  • सरकार ने बैंकों का 1.14 लाख करोड़ के गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) को माफ करने का फैसला लिया
  • ये रकम भारतीय बैंकों के पिछले तीन वित्तीय सालों ( 2013 से 2015 ) के दौरान हुई
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विस्तार
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सरकार ने बैंकों का 1.14 लाख करोड़ का एनपीए ( गैर निष्पादित परिसंपत्तियों ) को माफ करने का फैसला लिया है। ये रकम भारतीय बैंकों के पिछले तीन वित्तीय सालों ( 2013 से 2015 ) के दौरान हुई है।
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आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार इतनी रकम पिछले नौ वर्षों में सभी 29 राज्यों को मिलाकर एनपीए हुई रकम से भी ज्यादा है। इंडियन एक्सप्रेस की आरटीआई पर आरबीआई से मिली जानकारी के अनुसार मार्च 2012 में 15,551 करोड़ रुपए की एनपीए रकम बढ़कर मार्च 2015 में 52,542 करोड़ रुपए हो गयी।

वहीं जब बैंक से सबसे बड़े डिफाल्टर के बारे में पूछा गया कि वह बैंक है या कोई व्यक्ति जिसके 100 करोड़ से ज्यादा की रकम को माफ किया गया है, तो आरबीआई ने जानकारी न होने का हवाला दिया है,उसके अनुसार बैंक एकमुश्त रकम की जानकारी देते हैं न की किसी व्यक्ति विशेष के बारे में। एक ओर जहां सरकार बैंकों में इक्विटी डालकर उनकों वर्किंग कैपिटल मुहैया कराने की कोशिश कर रही है वहीं वर्ष 2004 से 2015 के बीच सरकार ने 2.11 लाख करोड़ रुपयों का एनपीए माफ किया। इसका करीब आधा एनपीए 2013 से 2015 के बीच माफ किया गया।
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केवल दो बैंक स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र और स्टेट बैंक ऑफ इंदौर ही हैं जिन्होंने पिछले पांच साल में कोई एनपीए अर्जित नहीं किया। दूसरी भाषा में कहा जाए तो सरकारी बैंकों में जहां वर्ष 2004 से 2012 के बीच एनपीए चार फीसद की दर से बढ़ा, वहीं 2013 से 2015 के बीच ये बढ़कर 60 फीसद हो गया। वहीं मार्च 2015 में जो लोन माफ किया गया वह 2013 में माफ किया गए लोन का 85 फीसद था।
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केवल चार बार एनपीए में दिखी गिरावट

आरटीआई से हासिल हुई जानकारी के मुताबिक वर्ष 2004 के बाद केवल चार बार ऐसे मौके आए जब एनपीए में गिरावट देखी गयी और वह भी आखिरी बार 2011 में हुआ था। अगर बात बैंकों के अनुसार की जाए तो देश के सबसे बड़ा बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया लोन की रकम को एनपीए घोषित करने में सबसे आगे रहा है। उसकी एनपीए हुई रकम वर्ष 2013 में जहां 5,594 करोड़ रही थी वहीं 2015 में ये 21,313 करोड़ हो गयी थी।

वर्ष 2015 में अकेले एसबीआई का एनपीए ही अन्य बैंकों को मिलाकर माफ किए गए लोन का 40 फिसद रहा था। वर्ष 2014 में भी यह अन्य बैंकों द्वारा माफ की गयी कुल रकम का 38 फीसद था। वहीं देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पीएनबी में भी एनपीए में 2013 के बाद बढ़ोतरी देखी गयी है। ये जहां 2013-14 में 95 फीसद बढ़ा था वहीं ये वर्ष 2014-15 में 238 फीसद बढ़ा। बैंकों में एनपीए की बढ़ोतरी से चिंतित आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन समय-समय पर बैंकों में एनपीए की कमी लाने के लिए उपायों को लागू करते रहे हैं और बैंकों के मर्जर पर जोर देते रहे हैं।

साथ ही डूब रही रकम को वापस लाने के लिए भी वह बैंक प्रोमोटर्स को सुझाव देते रहते हैं ताकि वह रकम आसानी से एनपीए घोषित करने के बजाए लोन लेने वालों से ही उसे वापस लेने की कोशिश करें।
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