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10 साल की बच्ची ने राजन को लिखा पत्र

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सितंबर 2013 में जब भारत सरकार डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत लगातार गिरने से जूझ रही थी, तब 10 साल की एक स्कूली छात्रा ने अर्थव्यवस्था को बेहतर करने के इरादे से रिजर्व बैंक को 20 डॉलर (करीब 1,171 रुपये) देने का प्रस्ताव रखा था।
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रघुराम राजन ने चार सितंबर, 2013 को आरबीआई के गवर्नर के रूप में पदभार संभाला था और अगले ही दिन लैला इंदिरा अल्वा ने उन्हें पत्र लिखा था।

लैला ने लिखा, "मैंने समाचारों में पढ़ा है कि हमारी अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है। मैंने यह भी सुना है कि रुपया डॉलर के मुकाबले गिर रहा है।"

दिल्ली से लगते, गुड़गांव, में रहने वाली लैला, ज्यादातर 10 साल की लड़कियों की तरह, अर्थव्यवस्था की चिंता करने में समय नहीं गुजारती। वह अपने दोस्तों के साथ खेलना, पढ़ना, गाना, गिटार बजाना, तैरना, दौड़ना पसंद करती है।

लेकिन पिछली गर्मियों में अर्थव्यवस्था की खराब हालत हर रोज सुर्खियां बन रही थीं। निर्माण क्षेत्र में मंदी आ गई थी, रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार गिर रहा था और भारत का चालू व्यापार का घाटा रोज-ब-रोज बढ़ता जा रहा था।
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चूंकि उनके अभिभावक रोज कई अखबार लेते थे, लैला ने उन खबरों को देखा और चेत गई।

उन्हें लगा सब गरीब हो जाएंगे

वह कहती हैं, "मैं जानती थी कि अर्थव्यवस्था मुद्रास्फीति और भ्रष्टाचार की वजह से कमजोर है। मैंने इसके बारे में अखबारों में पढ़ा था और मैंने अपने माता-पिता को खाने की मेज पर इसकी बात करते और समाचारों में सुना था। हर कोई इसी के बारे में बात कर रहा था।"

वह चिंतित हो रही थीं कि लोगों के पास अपना गुजारा चलाने के लिए पैसा नहीं होगा, सब परेशान होंगे और सब गरीब हो जाएंगे।

उनकी मां प्रिया सोमैया अल्वा कहती हैं कि वह अक्सर लैला और 13 साल के उसके भाई से खबरों में चल रही चीजों पर चर्चा करते थे।

वह कहती हैं, "पिछले सितंबर में हम लोग खाने की मेज पर बैठे हुए थे। मेरे पति और मैं डॉलर की दर पर बात कर रहे थे और रघुराम राजन समाचार में दिख रहे थे। वह आरबीआई के गवर्नर के रूप में पदभार ग्रहण करने जा रहे थे। शायद इसी तरह यह बात उठी होगी कि रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण करता है।"

अगले दिन स्कूल से लौटने के बाद लैला ने अपनी मां से पूछा कि क्या वह आरबीआई गवर्नर को चिट्ठी लिख सकती हैं, क्योंकि "शायद वह अर्थव्यवस्था में सुधार ला सकते हैं।"

प्रिया कहती हैं, "मैंने कहा, हां ज़रूर। तुम एक बच्ची हो और तुम जो चाहो वह कर सकती हो।"

चिट्ठी का जवाब

लैला का पत्र उनकी स्कूल की पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। इसमें उन्होंने लिखा है, "डॉ रघुराम राजन, कृपया हमारी अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कुछ नए उपाय करो। मैं चाहती हूं कि भारत आने वाले लोग इसे भ्रष्टाचार और गंदगी के देश की तरह न देखें।"

उन्होंने यह भी तय किया कि वह 20 डॉलर का वह नोट भी इसके साथ भेजेंगी जो उनके परिवार ने पिछले साल उन्हें इजराइल यात्रा के दौरान ख़र्च के लिए दिया था। क्योंकि "देश को इसकी मुझसे ज्यादा जरूरत थी।"

लैला कहती हैं, "लोग कहते हैं कि हर बड़ी चीज की शुरुआत छोटे से होती है, इसलिए मैंने सोचा कि मेरे 20 डॉलर कम हैं, लेकिन अगर लोगों के दिमाग में ठीक से बात आ गई तो यह ज्यादा हो सकते हैं। मैंने सोचा कि सभी लोग अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए कुछ न कुछ योगदान करेंगे और भारत तरक्की करेगा।"

दस दिन बाद, लैला को संबोधित एक सरकारी दिखने वाला लिफाफा उनके घर पहुंचा। उन्हें यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि यह खुद आरबीआई गवर्नर ने भेजा था।

उन्होंने लिखा था, "आपकी सहायता के प्रस्ताव ने मेरे दिल को छू लिया है। मैं जानता हूं कि देश के लिए यह मुश्किल वक्त है और इसके साथ ही मुझे यकीन है कि यह और मजबूत होकर उभरेगा।"

लिफाफे में वह 20 डॉलर का नोट भी था जो लैला ने आरबीआई गवर्नर को भेजा था।

'बहुत लंबे हैं वो, दानव जैसे'

रघुराम राजन ने उन्हें न्यौता दिया कि अगली बार जब वह मुंबई में हों तो उनसे मिलने आएं। राजन ने लिखा था, "मैं 20 डॉलर का वह नोट लौटा रहा हूं जो आपने मुझे भेजा था और यह विश्वास दिलाता हूं कि हमारे पास इस स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा है।"

लैला ने कहा कि वह उनकी इस प्रतिक्रिया से "सचमुच आश्चर्यचकित" थी।

वे बताती हैं, "मैंने सोचा था कि आरबीआई गवर्नर को चिट्ठी लिखना सामान्य बात होगी। मैंने यह नहीं सोचा था कि वह इसे सचमुच में पढ़ेंगे। मुझे लगता था कि वह किसी को चिट्ठी का जवाब देने को कह देंगे।"

हालांकि, लैला को उनका पैसा वापस भेजा जाना अच्छा नहीं लगा और उन्होंने सोचा "उन्होंने इसे न लेकर अच्छा नहीं किया।"

लेकिन उनके माता-पिता ने उन्हें समझाया, "देश की मदद करने के तरीके अलग होते हैं।"

नवंबर में, जब लैला के पिता एक व्यापार के सिलसिले में मुंबई गए तो वह रघुराम राजन से मिलने उनके साथ गई।

प्रिया कहती हैं, "वह बहुत खुश थीं, आरबीआई भवन से बहुत प्रभावित। उसने सिक्कों का संग्रहालय देखा और बहुत सारी कॉमिक्स लेकर आईं, जो बड़ों के लिए भी धन को समझना आसान बनाती हैं, लेकिन उनकी पहली प्रतिक्रिया थी- वह बहुत लंबे हैं।"

लैला फिर कहती हैं, "वह बहुत लंबे हैं। हम दोनों ने एक तस्वीर साथ खिंचाई है और वह लंबे हैं। एक दानव की तरह।"

राजन के साथ मुलाकात में लैला ने उनसे कुछ इस तरह के सवाल पूछे, "आरबीआई सबसे लिए रुपये क्यों नहीं छापती, ताकि कोई भी गरीब न रहे? उन्होंने मुझे बताया कि इससे मुद्रास्फीति बढ़ जाएगी और फिर उन्होंने मुझे पूरा सिद्धांत समझाया।"
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'शायद फ्रेम करवा लूं'

उनकी डेस्क के पीछे की दीवार पर पुराने आरबीआई गवर्नरों की तस्वीरें थीं, लेकिन "उनमें से कोई भी महिला गवर्नर नहीं थी। यह देखकर मुझे धक्का लगा और मैंने उनसे पूछा, क्यों? उन्होंने कहा कि हो सकता है कि एक दिन तुम बन जाओ।"

तो क्या अब वह बड़े होने पर यही बनना चाहती हैं?

लैला कहती हैं, "हो सकता है। लेकिन पहले मैं एक फोटोग्राफर बनना चाहती हूं और फिर एक लेखक और फिर एक गायक। हो सकता है एक दिन आरबीआई गवर्नर बनने के लिए काम करूं।"

फिलहाल इस वक्त वह अर्थव्यवस्था की हालत के बारे में बहुत चिंतित नहीं हैं, "पिछले साल एक डॉलर 70 रुपये के बराबर था, लेकिन राजन इसे 60 रुपये तक ले आए हैं।"

और उस 20 डॉलर के नोट के बारे में क्या?

लैला मानती हैं कि एक वक्त उन्होंने सोचा था कि इसे नोट में बदल कर खर्च कर लें, लेकिन अब उन्होंने अपना इरादा बदल दिया है।

वह कहती हैं, "मैं सोचती हूं कि इसे उस पत्र के साथ फ्रेम करवा लूं।"
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