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Co-Operative Banks: सहकारी बैंकों को मिले ज्यादा अधिकार, बुरे फंसे कर्ज को बट्टे खाते में डाल सकेंगे

Fri, 09 Jun 2023 06:43 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, मुंबई।

सार

केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बृहस्पतिवार को कहा कि सहकारी कर्ज क्षेत्र में अक्सर उचित प्रक्रिया की कमी और हितों के टकराव की खबरें मिलती रही हैं। इसे देखते हुए सहकारी कर्जदाताओं के लिए यह फैसला लिया गया है।
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आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास। - फोटो : ANI (फाइल फोटो)
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विस्तार
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देश के सहकारी बैंकों को पहले से ज्यादा अधिकार मिल गया है। अब वे जल्द ही गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) को बट्टे खाते में डाल सकेंगे और चूककर्ताओं के साथ समझौता निपटान कर सकेंगे। इसके लिए आरबीआई ने दबाव वाली संपत्तियों के समाधान ढांचे का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत सहकारी कर्जदाताओं सहित सभी विनियमित इकाइयां अब एनपीए का समाधान करने के लिए समझौता निपटान और फंसी हुई रकम को तकनीकी बट्टे खाते में डालने जैसे फैसले कर सकेंगी।

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केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बृहस्पतिवार को कहा कि सहकारी कर्ज क्षेत्र में अक्सर उचित प्रक्रिया की कमी और हितों के टकराव की खबरें मिलती रही हैं। इसे देखते हुए सहकारी कर्जदाताओं के लिए यह फैसला लिया गया है। इस पर जल्द ही व्यापक दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। अब तक फंसी हुई संपत्ति के समाधान की अनुमति केवल अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और चुनिंदा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को थी।

यूसीबी के लिए चुनौतियां कम करने की जरूरत
दास ने यह भी स्वीकार किया कि प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के कर्ज लक्ष्यों पर अन्य शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के सामने आने वाली कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों को कम करने की जरूरत है। मार्च, 2026 तक इस लक्ष्य को पाने के लिए समयसीमा को दो और साल के लिए बढ़ा दिया गया है।

  • 31 मार्च, 2023 तक लक्ष्यों को पूरा करने वाले कर्जदाताओं को उचित प्रोत्साहन दिया जाएगा।

खुदरा महंगाई में नरमी से बढ़ेगा परिवारों का खर्च

  • रबी उपज बढ़ने, सामान्य मानसून रहने और सेवाओं में तेजी के साथ महंगाई घटने से परिवारों का उपभोग बढ़ेगा।
  • बैंकों एवं कंपनियों के बही-खाते में सुधार, आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति बेहतर होने और अनिश्चितता घटने से निवेश का चक्र तेजी पकड़ेगा।
  • सरकार का पूंजीगत खर्च बढ़ने से भी निवेश-विनिर्माण गतिविधियां तेज होंगी।
  • निर्यात की तुलना में आयात घटने से भारत का व्यापार घाटा कम हुआ है।

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हम सिर्फ दरों को थाम रहे हैं, महंगाई में स्थायी गिरावट का रास्ता अभी काफी लंबा : दास
आरबीआई गवर्नर ने कहा, रेपो दर को नहीं बढ़ाने का फैसला सिर्फ एक ठहराव है। भविष्य में नीतिगत कार्रवाई पूरी तरह उस समय के आंकड़ों पर निर्भर करेगी। महंगाई में स्थायी गिरावट के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है। हालांकि, खुदरा महंगाई मार्च और अप्रैल में घटी है। इसके बावजूद यह 4 फीसदी के अनिवार्य लक्ष्य से ऊपर है। दास ने मौद्रिक नीति घोषणा के बाद कहा, महंगाई पर लगातार सतर्क नजरिया बनाए रखना जरूरी है क्योंकि मानसून और अल नीनो का प्रभाव अनिश्चित बना हुआ है। हमारा लक्ष्य टिकाऊ तरीके से महंगाई को 4 फीसदी से नीचे बनाए रखना है।

  • दास ने कहा, दुनिया के ज्यादातर केंद्रीय बैंकों ने जिंसों की कीमतें नरम होने के बीच ब्याज दरों में बढ़ोतरी रोक दी है। हालांकि, ऑस्ट्रिया और कनाडा ने इस सप्ताह बाजार को हैरान करते हुए ब्याज दरें बढ़ाई हैं।
  • केंद्रीय बैंक में डिप्टी गवर्नर एवं मौद्रिक नीति विभाग के प्रमुख माइकल पात्रा ने कहा, वर्ष के लिए नीतिगत रुख और महंगाई का पूर्वानुमान इस पूर्वधारणा पर आधारित है कि मूल्य सूचकांक इस साल 5.1 फीसदी के करीब रहेगा। इस अनुमान में धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी और अल नीनो प्रभाव को समायोजित किया गया है।

बैंकों में 1.80 लाख करोड़ के 2000 के नोट वापस आए
दास ने कहा, अब तक 1.80 लाख करोड़ रुपये के 2000 के नोट बैंकों में वापस आ गए हैं। यह आंकड़ा चलन में मौजूद 2000 रुपये के कुल नोटों का करीब 50 फीसदी है। केंद्रीय बैंक ने 19 मई को इन नोटों को वापस लेने की घोषणा की थी। 31 मार्च, 2023 तक कुल 3.62 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 2000 रुपये के नोट चलन में थे।

  • गवर्नर ने कहा, 2000 रुपये के करीब 85 फीसदी नोट बैंक खातों में जमा किए जा रहे हैं। बाकी नोटों को छोटे मूल्य वर्ग के नोटों से बदला जा रहा है।
  • हमें उम्मीद है कि 30 सितंबर तक 2000 के ज्यादातर नोट वापस बैंकिंग प्रणाली में आ जाएंगे।


ई-रुपी : गैर-बैंकिंग संस्थान कर सकेंगे जारी
सरकार की ओर से जल्द ही आम लोगों के लिए भी ई-रुपी डिजिटल वाउचर जारी किए जा सकते हैं। आरबीआई ने गैर-बैंकिंग कंपनियों को प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट (पीपीआई) के जरिये ई-रुपी वाउचर जारी करने की मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने व्यक्तियों की ओर से ई-रुपी वाउचर जारी करने की भी अनुमति दी है। इससे ई-रुपी वाउचर का लाभ व्यापक समूह तक पहुंचेगा। डिजिटल भुगतान को भी बढ़ावा मिलेगा।

फेमा के तहत लाइसेंसिंग ढांचा सरल और आसान बनेगा
आरबीआई ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा)-1999 के तहत अधिकृत व्यक्तियों के लिए लाइसेंसिंग ढांचे को युक्तिसंगत और सरल बनाने का फैसला किया है। इससे आम लोगों, पर्यटकों और व्यवसायों सहित उपयोगकर्ताओं के विभिन्न क्षेत्रों में विदेशी मुद्रा सुविधाओं के वितरण दक्षता में सुधार होगा।

बीबीपीएस : दक्षता और भागीदारी बढ़ाने पर जोर
दास ने कहा, भारत बिल भुगतान प्रणाली (बीबीपीएस) की दक्षता बढ़ाने और अधिक-से-अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए आरबीआई ने संचालन इकाइयों के लिए लेनदेन एवं सदस्यता मानदंड की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने का प्रस्ताव दिया है।

  • बीबीपीएस से 20,500 से अधिक बिल जारी करने वाले जुड़े हैं। ये हर महीने 9.8 करोड़ से अधिक लेनदेन करते हैं।

सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स को रेगुलेट नहीं करेगा आरबीआई
दास ने कहा, सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स को रेगुलेट करने की योजना नहीं बना रहे हैं। इसके लिए सेबी है।

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आरबीआई की बिना मंजूरी शाखाएं खोल सकते हैं शहरी सहकारी बैंक

देश के 1,514 शहरी सरकारी बैंकों को मजबूत करने के लिए आरबीआई ने चार प्रमुख उपायों को अधिसूचित किया है। इसमें प्रमुख रूप से प्राथमिकता वाले क्षेत्र के कर्ज लक्ष्यों को पूरा करने के लिए दो साल का और समय मिलेगा।

सहकारिता मंत्रालय ने कहा, सहकारिता मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के साथ हुई चर्चा के बाद इसे अधिसूचित किया गया है। इसके तहत, अपने कारोबार के विस्तार के लिए शहरी सहकारी बैंक अब पिछले वित्त वर्ष की शाखाओं की संख्या के 10 फीसदी तक (अधिकतम 5 शाखाएं) नई ब्रांच आरबीआई की अनुमति के बिना खोल सकते हैं। इन बैंकों को अपनी नीति के लिए अपने बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी।
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