सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को डिफॉल्टर्स की व्यक्तिगत गारंटी को लागू करने के निर्देश देने की मांग के साथ दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। मालूम हो कि एक व्यक्तिगत गारंटी गारंटर को एक व्यवसाय ऋण का भुगतान करने के लिए बाध्य करती है। कॉर्पोरेट उधारकर्ताओं के डिफॉल्ट होने पर प्रवर्तक व्यक्तिगत संपत्तियों को संपार्श्विक के रूप में प्रदान करते हैं।
क्या है मामला ?
जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी बैंकों पर कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा था। शीर्ष अदालत ने वित्त मंत्रालय को नोटिस जारी किया था। सौरभ जैन द्वारा दाखिल याचिका में सरकारी बैंकों पर बड़े कर्ज नहीं चुकाने वाली कंपनियों के निदेशकों, प्रबंधकीय कर्मियों और प्रवर्तकों की व्यक्तिगत गारंटी को तलब नहीं करने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई थी।
प्रति वर्ष 1900 करोड़ के नुकसान का दावा
याचिका में दावा किया गया था कि सरकारी बैंकों को इस लापरवाही के कारण हर साल करीब 1900 करोड़ रुपये का नुकसान होता है। उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, प्रमोटरों ने 1.85 लाख करोड़ रुपये के बकाया के लिए राज्य द्वारा संचालित बैंकों को व्यक्तिगत गारंटी प्रदान की हुई है।