देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने तिमाही नतीजों की घोषणा कर दी है। जून 2020 में समाप्त तिमाही में एसबीआई का शुद्ध लाभ 81 फीसदी बढ़कर 4,189.34 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह आंकड़ा 2,312.20 करोड़ रुपये था।
एसबीआई लाइफ में हिस्सेदारी की बिक्री से इतना हुआ लाभ
एसबीआई लाइफ में हिस्सेदारी की बिक्री के कारण बैंक को 1,367.27 करोड़ रुपये का एकमुश्त लाभ हुआ। इसकी वजह से एसबीआई की लाइफ इंश्योरेंस फर्म में हिस्सेदारी 57.60 फीसदी से घटकर 55.5 फीसदी रह गई है।
इतनी रही शुद्ध ब्याज आय
तिमाही के लिए शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) 26,641 करोड़ रुपये रही। पीएसयू ऋणदाता ने तिमाही के लिए 12,501.30 करोड़ रुपये के प्रावधान किए, जो मार्च तिमाही में किए गए 13,495.08 करोड़ रुपये के प्रावधानों से कम है, लेकिन पिछले साल की समान तिमाही में 9,182.94 करोड़ रुपये के मुकाबले ज्यादा है।
कोविड संबंधी खातों के लिए अतिरिक्त प्रावधान
राज्य द्वारा संचालित बैंक ने कोविड संबंधी खातों के लिए 1,836 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है। इसके साथ, कोविड-19 से संबंधित कुल प्रावधान 30 जून तक 3,008 करोड़ रुपये रहे। एसबीआई ने कहा कि 30 जून तक बैंक का प्रावधान कवरेज अनुपात (पीसीआर) 86.32 फीसदी था।
जून की तिमाही के दौरान बैंक ने धोखाधड़ी खातों को 5,230.37 करोड़ की पूरी शेष राशि प्रदान की है, जबकि तिमाही की आवश्यकता 1,743.46 करोड़ है।
डूबा हुआ कर्ज घटने से बैंक का मुनाफा बढ़ा है। तिमाही के दौरान बैंक की सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) घटकर 5.44 फीसदी रह गईं, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 7.53 फीसदी थीं। इसी तरह बैंक का शुद्ध एनपीए घटकर 1.8 फीसदी रह गया, जो एक साल पहले 3.07 फीसदी था।
एकीकृत आधार पर इतना रहा लाभ
एकीकृत आधार पर तिमाही के दौरान एसबीआई का शुद्ध लाभ 62 फीसदी बढ़कर 4,776.50 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 2,950.50 करोड़ रुपये था।तिमाही के दौरान बैंक की एकीकृत कुल आय बढ़कर 87,984.33 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 83,274.04 करोड़ रुपये थी।
शेयर बाजारों को भेजी सूचना में देश के सबसे बड़े बैंक ने कहा कि तिमाही के दौरान उसकी एकल कुल आय बढ़कर 74,457.86 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 70,653.23 करोड़ रुपये रही थी।