देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले ब्याज में भी कमी कर दी है। दो करोड़ रुपये से कम की फिक्स्ड डिपॉजिट पर एसबीआई की नई दरें 10 सितंबर 2020 से लागू हो गई है। एक साल से दो साल की अवधि के खुदरा टर्म डिपॉजिट पर अब 20 आधार अंक कम ब्याज मिलेगा। इससे पहले बैंक ने 27 मई को फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरें घटाई थी।
आइए जानते हैं कि दो करोड़ से कम की एफडी पर आपको कितना ब्याज मिलेगा।
| अवधि |
आम नागरिकों के लिए नई दर |
वरिष्ठ नागरिकों के लिए नई दर |
| सात से 45 दिन |
2.9 फीसदी |
3.4 फीसदी |
| 46 से 179 दिन |
3.9 फीसदी |
4.4 फीसदी |
| 180 से 210 दिन |
4.4 फीसदी |
4.9 फीसदी |
| 211 से एक साल |
4.4 फीसदी |
4.9 फीसदी |
| एक साल से दो साल |
4.9 फीसदी |
5.4 फीसदी |
| दो साल से तीन साल |
5.1 फीसदी |
5.6 फीसदी |
| तीन साल से पांच साल |
5.3 फीसदी |
5.8 फीसदी |
| पांच साल से 10 साल |
5.4 फीसदी |
6.2 फीसदी |
SBI वीकेयर डिपॉजिट की बढ़ी अंतिम तिथि
मालूम हो कि बैंक ने वरिष्ठ वागरिकों के लिए एफडी प्रोडक्ट 'SBI वीकेयर डिपॉजिट' को लॉन्च किया था। इसमें वरिष्ठ नागरिकों को पांच साल या उससे ज्यादा की अवधि के लिए रिटेल टर्म डिपॉजिट पर 30 आधार अंकों का अतिरिक्त प्रीमियम मिलता है। अब एसबीआई वीकेयर जमा योजना 31 दिसंबर 2020 तक जारी रहेगी। पहले इस योजना की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2020 थी। इससे वरिष्ठ वागरिकों को फायदा होगा।
क्रेडिट कार्ड के भुगतान में ग्राहकों को मिल सकती है मोहलत
मोरेटोरियम के बाद क्रेडिट कार्ड का भुगतान नहीं करने वाले ग्राहकों को एसबीआई और मोहलत दे सकता है। एसबीआई कार्ड के शीर्ष अधिकारी ने रविवार को कहा कि कंपनी उन ग्राहकों को भी कर्ज पुनर्गठन योजना में शामिल कर सकती है, जो मोरेटोरियम के बाद भी भुगतान नहीं कर सके हैं।
कर्ज पुनर्गठन योजना में शामिल हो सकते हैं ग्राहक
कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ अश्विनी कुमार तिवारी ने बताया कि आरबीआई की गाइडलाइन के तहत मार्च से मई तक भुगतान नहीं करने वाले ग्राहकों के खाते स्टैंडर्ड रखे गए। इसके बाद मोरेटोरियम तीन महीने बढ़ाकर अगस्त तक कर दिया गया, लेकिन यह सुविधा पाने के लिए ग्राहकों को चुनाव करने का विकल्प दिया गया। कई ग्राहकों ने फिर मोरेटोरियम लिया और कुछ ने भुगतान करना शुरू कर दिया। वहीं, कई ग्राहकों ने न तो दोबारा मोरेटोरियम का विकल्प चुना और न ही भुगतान किया।