भारतीय रिवर्ज बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में कटौती करने के फैसले को भले ही उद्योग जगत दीपावली के पहले का बोनस बता रहा हो, लेकिन आम बचतकर्ताओं के लिए यह फैसला बचत के प्रतिफल पर डाका साबित होगा।
अर्थव्यवस्था के जानकार अर्थशास्त्री देवेंद्र शर्मा का कहना है कि इससे लोग बचत के प्रति हतोत्साहित भी हो सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो यह अर्थव्यवस्था के लिए और घातक होगा।
विज्ञापन
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की गहरी समझ रखने वाले अर्थशास्त्री देवेन्द्र शर्मा का कहना है कि यह तो आम बचतकर्ताओं की जेब पर डाका है। उनका कहना है कि रिजर्व बैंक के इस फैसले पर शेयर बाजार और उद्योग जगत में भले ही खुशियां व्यक्त की जा रही हो लेकिन आम बचतकर्ता को तो घाटा ही होगा।
गरीब की रकम अमीरों को
उनके मुताबिक अभी भी समाज का निम्न मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग, चाहे वे गांव में रहते हों या शहरों में, अपनी बचत को सुरक्षित रखने और इसमें बढ़ोतरी के लिए बैंक के मियादी जमा खाता, पीपीएफ और डाकघर की बचत योजनाओं को ही प्राथमिकता देता है।
इन्हें शेयर बाजार, वायदा बाजार या म्यूचुअल फंड के बारे में कोई जानकारी नहीं है। बैंक अपना बेस रेट घटाएंगे तो ऐसे बचतकर्ताओं का रिटर्न घट जाएगा। उनका कहना है कि यह तो गरीब आदमी की जेब से रकम निकाल कर अमीरों की जेब में डालना हुआ।
एक अनुमान का हवाला देते हुए वह कहते हैं कि देश में छोटी बचतों का लाभ लेने वाले निवेशकों की संख्या करीब 10 करोड़ है जबकि होम लोन या ऑटो लोन लेने वालों की संख्या एक करोड़ भी नहीं है।
सरकार इन लोन लेने वालों के सहारे उद्योग जगत की मांग पूरी कर रही है जबकि बचतकर्ताओं को उनके हाल पर छोड़ रही है। अभी देश की अर्थव्यवस्था में बचत की दर करीब 30 फीसदी है, वह इस फैसले से घट भी सकती है।
उल्लेखनीय है कि दशहरा और दीवाली के त्योहार से पहले ही, मंगलवार को रिजर्व बैंक ने पिछले तीन वर्षों की अवधि में पहली बार नीतिगत ब्याज दरों में 0.5 फीसदी की कटौती की थी।
रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में आधा फीसदी की कटौती करते ही केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संवाददाताओं के समक्ष इसे स्वागत योग्य कदम बताते हुए वाणिज्यिक बैंकों को इस पर अमल करने की नसीहत दे दी।
जब देश के वित्त मंत्री ऐसा कह रहे हों तो फिर बैंक बेस दरों में कटौती से कैसे इंकार कर सकते हैं। मंगलवार को स्टेट बैंक समेत कुछ बैंकों ने बेस रेट में कटौती की घोषणा कर दी जबकि बुधवार को भी कई बैंकों ने ब्याज दरें घटाईं।