भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि वैश्विक आर्थिक स्थिति पिछले एक पखवाड़े में अचानक बिगड़ी है। कई देशों के अधिकारियों और केंद्रीय बैंकों ने लॉकडाउन और सामाजिक दूरी के कारण व्यापक आर्थिक गिरावट से निपटने के लिए लक्षित नीतिगत साधनों की विस्तृत श्रृंखला का इस्तेमाल किया है।
ऐसे में रिजर्व बैंक सतर्क रहेगा और कोविड-19 के प्रभाव को कम करने, विकास को बहाल करने और वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए किसी भी उपकरण का उपयोग करने में संकोच नहीं करेगा।
बढ़ रही है वैश्विक मंदी की आशंका
उन्होंने कहा कि वैश्विक मंदी की आशंका बढ़ रही है, जो पहले के वैश्विक वित्तीय संकट के मुकाबले अधिक गहरी हो सकती है। भारत में भी अल्पकालीन अवधि के वृद्धि अनुमानों में तेजी से गिरावट आई है। शुरुआत में वैश्विक गिरावट और कोविड-19 संक्रमण बढ़ने के चलते और इसके बाद सरकार द्वारा महामारी को रोकने के लिए घोषित देशव्यापी लॉकडाउन से यह स्थिति बनती दिख रही है।
मुद्रास्फीति को रोकने में मिलेगी मदद
मुद्रास्फीति के बारे में दास ने कहा कि परिदृश्य में व्यापक बदलाव आया है। गवर्नर ने कहा कि अगर मांग की दशाओं के सामान्य होने में अधिक समय लगा तो आमतौर पर गर्मियों के महीनों में बढ़ने वाली मांग के कमजोर रहने के आसार हैं। सकल घरेलू मांग के कमजोर रहने से मुद्रास्फीति को रोकने में मदद मिल सकती है।
अदृश्य रूप से वार करने वाली महामारी
उन्होंने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी अदृश्य रूप से वार करने वाली है, जिसे मानव जीवन और व्यापक अर्थव्यवस्था पर कहर बरपाने से पहले काबू में किए जाने की जरूरत है।’’ दास ने कहा, ‘‘इस परिदृश्य में यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि वित्त, जो अर्थव्यवस्था का जीवन रेखा है, अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में निर्बाध रूप से बहता रहे।’’
शक्तिकांत दास की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 24 से 27 मार्च के बीच हुई थी। इस बैठक में रेपो रेट में 0.75 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट में 0.90 फीसदी की कटौती का एलान किया गया था। कोविड-19 से जुड़े संकट के बीच आरबीआई की बैठक का आयोजन निर्धारित समय से पहले किया गया था। इस बैठक का आयोजन पूर्व के कार्यक्रम के अनुसार 31 मार्च, एक अप्रैल और तीन अप्रैल को किया जाने वाला था।