भारत की सुस्त अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए रिजर्व बैंक लगातार चौथी बार रेपो रेट में कटौती कर सकता है। एक सर्वे में अर्थशास्त्रियों ने कहा कि अगस्त के पहले सप्ताह में होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में आरबीआई अपने नरम रुख को बरकरार रख सकता है।
उन्होंने कहा कि आरबीआई 0.25 फीसदी घटाकर रेपो रेट को 5.50 फीसदी पर ला सकता है। तीन अर्थशास्त्रियों ने कहा कि इस बार 50 आधार अंकों की कटौती हो सकती है, जबकि 10 ने यथास्थिति बरकरार रखने का अनुमान जताया। कैपिटल इकोनॉमिक्स के एशियाई अर्थशास्त्री गेरेथ लीथर ने कहा कि महंगाई में नरमी और विकास दर की सुस्ती को देखते हुए एक और कटौती होने जा रही है।
इतना ही नहीं 2020 की शुरुआत में एक बार फिर रेपो रेट नीचे आएगी और 5.25 फीसदी पर अगले एक साल तक स्थिर रहेगी। गौरतलब है कि आरबीआई ने फरवरी, अप्रैल और जून में लगातार तीन बार 0.25 फीसदी की कटौती की है।
वैश्विक डाटा एजेंसी डन एंड ब्रैडस्ट्रीट का कहना है कि मानसून की मार और खाद्य उत्पादों की कीमतों में उछाल के कारण आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति को स्थिर रख सकता है। इस कारण अगस्त में होने वाली एमपीसी बैठक में एक और रेपो रेट कटौती की उम्मीदों को झटका लगेगा। डन एंड ब्रैडस्ट्रीट इंडिया के मुख्य अर्थशास्त्री अरुण सिंह ने कहा कि रेपो रेट में बदलाव से पहले कृषि उत्पादों और मानसून को ध्यान में रखना होगा।