कोविड-19 महामारी से प्रभावित कर्जधारकों के लिए 15 सितंबर तक कर्ज पुनर्गठन योजना लागू हो सकती है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को बैंकों और एनबीएफसी प्रमुखों के साथ बैठक में मोरेटोरियम खत्म होने के बाद ग्राहकों को जल्द राहत देने का निर्देश दिया है।
तीन-चार घंटे तक चली बैठक में सीतारमण ने बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से कहा है कि योजना पर बोर्ड की मंजूरी के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये तत्काल समीक्षा बैठक की जाए। मोरेटोरियम खत्म होने के बाद इस योजना को जल्द लागू करने से बैंकों की साख पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा और कर्जधारकों को मदद भी मिल जाएगी। मार्च से छह महीने के लिए लागू लोन मोरेटोरियम 31 अगस्त को समाप्त हो चुका है। वित्तमंत्री ने कर्जदाताओं से योग्य कर्जदारों की पहचान करने और उनके ऋण समाधान का खाका बनाने के साथ सभी क्षेत्र के कारोबार में सुधार की कार्ययोजना बनाने को कहा है। 6 सितंबर को आरबीआई की गाइडलाइन आने के बाद 15 सितंबर, 2020 तक हर हाल में समाधान योजना लागू हो जानी चाहिए, जिसके बाद जागरूकता फैलाने के लिए मीडिया अभियान भी चलाया जाएगा।
31 दिसंबर तक योजना में शामिल हो सकेंगे कर्जदार
सीतारमण ने कर्जदाताओं से कहा है कि ग्राहकों को अपडेट करने के लिए समय-समय पर योजना से जुड़े समाधान अपनी वेबसाइट और शाखाओं पर हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में जारी करते रहें। वित्त मंत्रालय योजना को प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए आरबीआई के साथ काम करता रहेगा। वैसे कर्जधारक 31 दिसंबर, 2020 तक कभी भी योजना में शामिल हो सकते हैं लेकिन बैंक उन्हें जल्द शामिल कराने की कोशिश करें। इसका लाभ दो साल तक दिए जाने की तैयारी है। पीएनबी ने पिछले दिनों कहा था कि वह 40 हजार करोड़ का कर्ज पुनर्गठन कर सकता है।
अर्थव्यवस्था और जीएसटी पर वित्त आयोग की बैठक आज
15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह की अगुवाई में शुक्रवार को आर्थिक सलाहकार परिषद जीडीपी विकास दर, जीएसटी और राजस्व में गिरावट पर मंथन करेगी। मामले से जुड़े अधिकारी ने बताया कि यह बैठक हाल में जारी जीडीपी के तिमाही आंकड़ों में रिकॉर्ड गिरावट के बाद हो रही है, जहां अप्रैल-जून तिमाही की विकास दर शून्य से 23.9 फीसदी नीचे चली गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार का राजकोषीय घाटा जुलाई में ही बजट लक्ष्य को पार कर चुका है, जबकि राजस्व व कर वसूली में लगातार गिरावट जारी है। वित्त आयोग और आर्थिक सलाहकार परिषद इन सभी मुद्दों पर चर्चा कर चुनौतियों से निपटने का हल निकालेंगे। केंद्र पर राज्यों का जीएसटी भरपाई के रूप में 1.5 लाख करोड़ का बोझ हो गया है और राज्य सरकारों के कर्ज लेने के विकल्प से इनकार करने की वजह से चुनौतियां और बढ़ गई हैं।