संक्रमण की दूसरी लहर में कोरोना मरीजों की संख्या बेतहासा बढ़ रही। ऐसे में जहां अस्पतालों में बेड की कमी से लाखों मरीजों को घर पर इलाज कराना पड़ रहा, वहीं अधिकतर बीमा कंपनियां इस खर्च के भुगतान से कतरा रही हैं। संकट की इस घड़ी में कैसे सही बीमा पॉलिसी चुनें और क्लेम करें जानकारी देती प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट-
पॉलिसी बाजार के स्वास्थ्य बीमा प्रमुख अमित छाबड़ा कहते हैं कि कहीं स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में घर पर इलाज की सुविधा होती है। लेकिन यह दो स्थितियों में ही मिलती है। पहला, किसी भी अस्पताल में बेड उपलब्ध न हो। दूसरा, मरीज इतना गंभीर हो कि अस्पताल तक जा ही न सके।
कंपनियां शर्तों पर देती है घर में इलाज का खर्च
ऐसे में अस्पताल में भर्ती होने पर मिलने वाले लाभ घर पर भी दिए जाते हैं। कोविड-19 शामिल है यह विकल्प छह-सात साल से मिल रहा है। अधिकतर नियमित स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियां घर पर इलाज का प्रावधान रखती हैं। हालांकि दावे से पहले यह देखना जरूरी होगा कि पॉलिसी में 'हॉस्पिटलाइजेशन एट होम' की शर्त जुड़ी है अथवा नहीं। कुछ कंपनियां श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से की बीमारियों को बाहर रखती है और कोविड-19 भी उनमें शामिल हो सकता है
क्लेम करने में सावधानी बरतें
- होम केयर के तहत बीमा क्लेम के लिए सभी जांच रिपोर्ट, दवा खरीदारी की पर्ची, सिटी स्कैन रिपोर्ट, डॉक्टर की पर्ची आदि जरूरी दस्तावेज होने चाहिए।
- किसी भी कंपनी का स्वास्थ्य बीमा लेने से पहले यह जरूर पता कर लें कि उसमें होम केयर की सुविधा है या नहीं।
- पॉलिसी का फायदा लेने के लिए मरीज की कोरोना रिपोर्ट आईसीएमआर से मंजूर लैब से होनी चाहिए। इसमें आरटी पीसीआर रिपोर्ट बहुत जरूरी है, जिसमें स्पेशनमेन रेफरल फॉर्म आईडी भी हो। होम आइसोलेशन और इलाज के दौरान डॉक्टर की सलाह के दस्तावेज हों।
- घर पर इलाज से जुड़ी बात डॉक्टर को साफ तौर पर लिखनी होगी। यह सिफारिश बीमा कंपनी के पास जमा करानी होगी।
- कुछ कंपनियां अपने नेटवर्क के किसी अस्पताल में बैठने वाले डॉक्टर की होमकेयर सिफारिश ही मानती हैं।
कोरोना कवच देता है इलाज की गारंटी
पिछले साल जून में कोरोना इलाज के लिए सभी कंपनियों ने कोरोना कवच नाम से मानक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी उतारी थी।। यह खासकर कोविड-19 लाज में इस्तेमाल होती है। इस पॉलिसी के तहत न्यूनतम 50 हजार और अधिकतम 5 लाख रुपये का कवर मिलता है। कोरोना कवच पॉलिसी मरीजों को 14 दिन तक घर पर इलाज का खर्च वहन करती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि पॉलिसी में शामिल पूरी राशि का इस्तेमाल एक व्यक्ति अपने इलाज में कर सकता है। हालांकि परिवार के हर सदस्य के लिए अलग-अलग पॉलिसी लेनी होगी। एरडा ने पॉलिसी की समय अवधि बढ़ाकर 30 सितंबर कर दी है जो पहले 31 मार्च थी।
होम केयर पैकेज की विशेष सुविधा
कई बीमा कंपनियां अपने ग्राहकों को होमकेयर पैकेज भी उपलब्ध करा रही है। इस पैकेज के जरिए घर में आइसोलेट रहकर इलाज कराने वालों को स्वास्थ्य बीमा का फायदा मिल सकता है। बीमा कंपनियों के होम केयर पैकेज में दवा, घर पर नर्स और डॉक्टर की जांच, सीटी स्कैन, एक्स-रे और कोरोना टेस्ट आदि सुविधाओं को शामिल किया गया है जब तक मरीज की रिपोर्ट निगेटिव नहीं आ जाती, तब तक उसके सभी मेडिकल खर्च इसमें कवर किए जाते हैं।
आईसीयू का खर्च नहीं उठाती कंपनियां
घर पर कोरोना इलाज के दौरान आईसीयू जैसी सुविधा और इलाज की जरूरत पड़े तो शायद बीमा कंपनी पूरा खर्च नहीं उठाएं। इसकी पुष्टि पहले ही अपने सेवा प्रदाता से कर लेनी चाहिए। कई कंपनियां होम केयर सुविधा के तहत पॉलिसी में शामिल कुल बीमा राशि का 10 से 50 प्रतिशत ही भुगतान करती हैं।
- मनोज जैन, बीमा विशेषज्ञ