आयकर विभाग के अधिकारियों द्वारा तैयार एक विश्लेषण रिपोर्ट की मानें तो नोटबंदी के बाद सहकारी बैंक के खाते में गंभीर गड़बड़ी पकड़ी गई है। आयकर विभाग ने बैंकिंग क्षेत्र के नियामक भारतीय रिजर्व बैंक को इस बारे में पत्र लिखकर कई सहकारी बैंकों के खातों में करोड़ों रुपये के कथित अवैध लेनदेन के बारे में जानकारी दी है।
विभाग द्वारा तैयार एक विश्लेषण रिपोर्ट में मुंबई और पुणे के दो मामलों का जिक्र किया गया है, जिनमें दो बैंकों में चलन से हटाए गए 500 और 1,000 के पुराने नोटों में 113 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि सामने आई। इसकी जानकारी बैंकिंग क्षेत्र के नियामक को दे दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, पुणे के बैंक ने रिजर्व बैंक को 242 करोड़ रुपये के नोट होने की जानकारी दी, जबकि उसके पास वास्तव में 141 करोड़ रुपये ही थे। यानी इस सहकारी बैंक ने 23 दिसंबर 2016 के उसके पास 101.70 करोड़ रुपये के अतिरिक्त पुराने नोट होने की जानकारी दी। मुंबई में इसी तरह के एक मामले में बैंक ने 11.89 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि होने की जानकारी दी थी। आयकर विभाग के अधिकारियों ने नोटबंदी के बाद पिछले साल इन दोनों बैंकों का सर्वेक्षण किया था। इस दौरान उन्हें चलन से बाहर किये गये नोटों, जिसे बैंकिंग भाषा में स्पेसिफाइड बैंक नोट (एसबीएन) कहा जाता है, की इन बैंकों में उपलब्धता और रिजर्व बैंक को दी गई जानकारी में गंभीर अंतर नजर आया।