2017-18 में बैंकों में केवल 114 लाख करोड़ रुपये जमा हुए। लेकिन इसी दौरान म्यूचुअल फंड में 21.36 लाख करोड़ रुपये जमा किए गए। इसके अलावा लोगों ने इन्श्योरेंस कंपनियों से भी करीब 193 लाख करोड़ रुपये की पॉलिसी को खरीदा।
बैंक बढ़ा सकते हैं ब्याज दर
एफडी कम होने से बैंक अब अपनी ब्याज दरों में भी इजाफा कर सकते हैं, जिसके बाद बैंकों से लोन लेना और महंगा हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि बैंक अपने यहां जमा रुपयों के आधार पर ही ब्याज दरों को तय करते हैं। हाल ही में कई प्रमुख बैंकों ने अपनी एफडी और लोन पर लगने वाली ब्याज दर को काफी बढ़ा दिया था।