रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने प्राइवेट सेक्टर के दूसरे सबसे बड़े बैंक ICICI पर 58.9 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। केंद्रीय बैंक ने कहा था कि आईसीआईसीआई बैंक ने पहले से तय नियमों का पालन करने में अनदेखी की, जिसके बाद उसको यह कदम उठाना पड़ा।
इसलिए उठाया कदम
केंद्रीय बैंक ने प्रेस रिलीज जारी करते हुए कहा है कि बैंक ने अपने HTM पोर्टफोलियो की सिक्युरिटिज को बेचा था, लेकिन इसके बारे में जानकारी साझा नहीं की थी। केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग रेग्यूलेशन एक्ट 1949 के सेक्शन 47ए(1)(सी) और सेक्शन 46(4)(आई) के तहत ऐसा किया है।
20 बैंकों ने दिया था कर्ज
आईसीआईसीआई बैंक ने कहा है कि वीडियोकॉन को 20 बैंकों ने लोन दिया था। बैंक लोन देने वाले कंशोर्शियम का हिस्सा था, जिसमें उसका योगदान मात्र 10 फीसदी था। अन्य बैंकों ने जिन शर्तों पर वीडियोकॉन को लोन दिया था, उसी का पालन बैंक ने भी किया था।
बैंक ने कहा है कि उसका लोन देने का सिस्टम मजबूत है। यह इस तरह से बनाया गया है कि कोई एक शख्स किसी कंपनी को कर्ज देने के बारे में फैसला नहीं कर सकता। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बैंक की सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को लोन पास कराने की एवज में एक कंपनी में हिस्सेदारी दी गई थी।
विडियोकॉन ग्रुप के मालिक धूत ने दीपक कोचर के साथ मिलकर बराबर की पार्टनरशिप में दिसंबर 2008 में न्यूपावर नाम से एक कंपनी खोली थी। इसमें यह भी कहा गया था कि कोचर परिवार, चंदा कोचर के रिश्तेदार महेश आडवाणी और नीलम आडवाणी संदेहास्पद बिजनेस ट्रांजेक्शन की मदद से धूत परिवार की ओर से स्थापित कंपनी न्यूपावर के मालिक बन गए थे। गुप्ता का कहना था कि लोन के बदले कंपनी का मालिकाना हक कोचर परिवार को ट्रांसफर किया गया था।