मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने शुक्रवार को कहा है कि सरकार को 2020 तक पीएसयू बैंकों की बैलैंस शीट को मजबूत करने के लिए 1.2 लाख करोड़ रुपये की पूंजी प्रवाहित करनी होगी। यह सरकार की 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी प्रवाहित करने की योजना से काफी अधिक है।
मूडीज ने कहा है कि बैंकों की असेट क्वालिटी अगले 12 माह में दबाव में रहेगी और ज्यादा प्रोविजनिंग मुनाफे को कम करने के साथ आंतरिक तौर पूंजी पैदा करने क्षमता को सीमित करेगी। मूडीज ने कहा है कि मार्च 2016 को समाप्त वित्त वर्ष के नतीजों के मद्देनजर मूडीज का विश्लेषण दिखाता है कि 11 सरकारी बैंकों की 1.2 लाख करोड़ रुपये पूंजी की जरूरत सरकार द्वारा 2020 तक बैंकों में प्रवाहित किए जान के लिए तय की 450 अरब रुपये की राशि से काफी अधिक है।
सरकारी बैंकों को पिछले वित्त वर्ष में 18,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह नुकसान खराब कर्ज के लिए ज्यादा प्रोविजनिंग करने की वजह से हुआ है। सरकार इस वित्त वर्ष में बैंकों को 25,000 करोड़ रुपये की पूंजी मुहैया कराएगी। मूडीज का कहना है कि ज्यादातर बैंकों के शेयर अपनी बुक वैल्यू से नीचे कारोबार कर रहे हैं। इससे पूंजी बाजार से पूंजी जुटाने की बैंकों की क्षमता सीमित हो जाती है। सरकारी बैंकों की कमजोर आय की संभावनाएं बाहरी पूंजी की जरूरतों के ऊंचे स्तर का उल्लेख करतीं हैं और उनकी कैपिटलाइजेशन प्रोफाइल और खराब होगी जब तक सरकार अतिरिक्त पूंजी समर्थन नहीं मुहैया कराएगी।
मूडीज की वी-पी और सीनियर एनॉलिस्ट अल्का अनबरासू ने कहा कि इसके अलावा बैंकों की असेट क्वालिटी अगले 12 दबाव में रहेगी क्योंकि उनको कॉरपोरेट समूहों से गैर निष्पादित कर्जो को मान्यता देनी होगी, खास कर स्टील और पावर सेक्टर से। अगस्त 2015 में, सरकार ने 70,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। सरकारी बैंकों को इसे अगले 4 वर्षो में वितरित किया जाना है। मार्च, 2016 के अंत सरकार 25,000 करोड़ रुपये बैंकों को पहले ही वितरित कर चुकी है। 2017-18 और 2018-19 भी प्रत्येक वर्ष 10,000 करोड़ रुपये प्रवाहित करने का प्रावधान किया गया है।