भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार के बीच चल रही है तनातनी अगर बोर्ड की बैठक के बाद भी नहीं सुधरती है तो फिर केंद्र, आरबीआई पर सेक्शन 7 का इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि बोर्ड की बैठक के बाद ही सरकार के अगले कदम के बारे में पता चलेगा।
क्या है विवाद की जड़?
कहा जा रहा है कि आरबीआई और सरकार के बीच संबंधों में कड़वाहट महीनों से थी, लेकिन हाल के दिनों में अर्थव्यवस्था में आई मंदी के कारण कलह सतह पर आ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, कमजोर होता रुपया और बैंकिंग सेक्टर में बेशुमार बढ़ते एनपीए के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था चौतरफा घिरी हुई है।
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने अपने भाषण में अर्जेंटीना के 2010 के आर्थिक संकट का जिक्र करते हुए चेताया था। कहा जा रहा है कि विरल काफी ग़ुस्से में थे और उनका भाषण दर्शकों को हैरान करने वाला था।
अर्जेंटीना के केंद्रीय बैंक के गवर्नर को जमा पूंजी सरकार को देने के लिए मजबूर किया गया था। अर्जेंटीना को डिफॉल्टर तक होना पड़ा था। विरल आचार्य ने कहा कि अर्जेंटीना को सरकार के हस्तक्षेप की भारी कीमत चुकानी पड़ी थी।
आचार्य ने कहा था, ''जो सरकारें केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता का सम्मान नहीं करती हैं वहां के बाजार तत्काल या बाद में भारी संकट में फंस जाते हैं। अर्थव्यवस्था सुलगने लगती है और अहम संस्थाओं की भूमिका खोखली हो जाती है।''
23 अक्तूबर को रिजर्व बैंक के बोर्ड में मचा हंगामा अभी जारी है और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंशकालिक निदेशक स्वामीनाथन गुरुमूर्ति भी लगातार अपने फोरम पर बोल रहे हैं।
अमर उजाला से बातचीत के दौरान गुरुमूर्ति ने कहा कि वह अपने फोरम पर अपनी बात पहुंचा रहे हैं। उन्हें इसकी तकलीफ है कि उन्होंने जो पत्र आरबीआई गवर्नर को लिखा था, उसकी प्रति अन्य निदेशकों को भी भेजी थी। उनके संस्कार मीडिया या किसी अन्य फोरम पर अभी बोलने की इजाजत नहीं देते, लेकिन किसी ने जानबूझकर इस पत्र को लीक किया।
वह विरल आचार्य ने जो किया गुरुमूर्ति का कहना है कि उन्होंने वहीं लिखा है। वह इसे रिजर्व बैंक के फोरम पर उठा रहे हैं और वहां से बाहर किसी से कोई बात नहीं करना चाहते। इस बीच स्वदेशी जागरण मंच के अश्विनी महाजन ने कहा कि रिजर्व बैंक के गवर्नर यदि सरकार के साथ तालमेल बनाकर और अनुशासन में काम नहीं कर सकते तो उन्हें पद से हट जाना चाहिए।
सरकार को करना पड़ेगा संशोधन
अगर सरकार आरबीआई के रिर्जव का इस्तेमाल करना चाहती है तो फिर उसे आरबीआई एक्ट में संशोधन करना होगा। सेक्शन 47 के अनुसार केंद्र सरकार को आरबीआई का केवल मुनाफा ही डिविडेंड के माध्यम से ट्रांसफर हो सकता है। 2017-18 में आरबीआई ने सरकार को करीब 50 हजार करोड़ रुपया ट्रांसफर किया था, जो कि 2015-16 के बाद से सबसे ज्यादा है।