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आरबीआई-सरकार विवादः बैठक के नतीजे से निकलेगा सरकार का अगला फैसला

Mon, 19 Nov 2018 01:11 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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RBI Headquarter - फोटो : PTI
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भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार के बीच चल रही है तनातनी अगर बोर्ड की बैठक के बाद भी नहीं सुधरती है तो फिर केंद्र, आरबीआई पर सेक्शन 7 का इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि बोर्ड की बैठक के बाद ही सरकार के अगले कदम के बारे में पता चलेगा। 

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क्या है विवाद की जड़?

कहा जा रहा है कि आरबीआई और सरकार के बीच संबंधों में कड़वाहट महीनों से थी, लेकिन हाल के दिनों में अर्थव्यवस्था में आई मंदी के कारण कलह सतह पर आ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, कमजोर होता रुपया और बैंकिंग सेक्टर में बेशुमार बढ़ते एनपीए के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था चौतरफा घिरी हुई है।

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने अपने भाषण में अर्जेंटीना के 2010 के आर्थिक संकट का जिक्र करते हुए चेताया था। कहा जा रहा है कि विरल काफी ग़ुस्से में थे और उनका भाषण दर्शकों को हैरान करने वाला था।
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अर्जेंटीना के केंद्रीय बैंक के गवर्नर को जमा पूंजी सरकार को देने के लिए मजबूर किया गया था। अर्जेंटीना को डिफॉल्टर तक होना पड़ा था। विरल आचार्य ने कहा कि अर्जेंटीना को सरकार के हस्तक्षेप की भारी कीमत चुकानी पड़ी थी।

आचार्य ने कहा था, ''जो सरकारें केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता का सम्मान नहीं करती हैं वहां के बाजार तत्काल या बाद में भारी संकट में फंस जाते हैं। अर्थव्यवस्था सुलगने लगती है और अहम संस्थाओं की भूमिका खोखली हो जाती है।''

23 अक्तूबर को रिजर्व बैंक के बोर्ड में मचा हंगामा अभी जारी है और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंशकालिक निदेशक स्वामीनाथन गुरुमूर्ति भी लगातार अपने फोरम पर बोल रहे हैं।
अमर उजाला से बातचीत के दौरान गुरुमूर्ति ने कहा कि वह अपने फोरम पर अपनी बात पहुंचा रहे हैं। उन्हें इसकी तकलीफ है कि उन्होंने जो पत्र आरबीआई गवर्नर को लिखा था, उसकी प्रति अन्य निदेशकों को भी भेजी थी। उनके संस्कार मीडिया या किसी अन्य फोरम पर अभी बोलने की इजाजत नहीं देते, लेकिन किसी ने जानबूझकर इस पत्र को लीक किया। 

वह विरल आचार्य ने जो किया गुरुमूर्ति का कहना है कि उन्होंने वहीं लिखा है। वह इसे रिजर्व बैंक के फोरम पर उठा रहे हैं और वहां से बाहर किसी से कोई बात नहीं करना चाहते। इस बीच स्वदेशी जागरण मंच के अश्विनी महाजन ने कहा कि रिजर्व बैंक के गवर्नर यदि सरकार के साथ तालमेल बनाकर और अनुशासन में काम नहीं कर सकते तो उन्हें पद से हट जाना चाहिए।

सरकार को करना पड़ेगा संशोधन

अगर सरकार आरबीआई के रिर्जव का इस्तेमाल करना चाहती है तो फिर उसे आरबीआई एक्ट में संशोधन करना होगा। सेक्शन 47 के अनुसार केंद्र सरकार को आरबीआई का केवल मुनाफा ही डिविडेंड के माध्यम से ट्रांसफर हो सकता है। 2017-18 में आरबीआई ने सरकार को करीब 50 हजार करोड़ रुपया ट्रांसफर किया था, जो कि 2015-16 के बाद से सबसे ज्यादा है। 

संसद से होगा अनुमोदन

केंद्र सरकार को आरबीआई एक्ट में किसी भी तरह का बदलाव करने के लिए संसद से अनुमोदन लेना होगा। आरबीआई एक्ट के सेक्शन 58 (4) के मुताबिक आरबीआई का बोर्ड जो भी बदलाव करना चाहता है, वो उसे सरकार के पास भेजना होगा। सरकार इसे ससंद में भेजेगी, जहां से पास होकर के यह बदलाव आस्तित्व में आएगा। 

18 लोग बोर्ड में हैं शामिल 

आरबीआई के बोर्ड में गवर्नर उर्जित पटेल सहित 18 लोग शामिल हैं। आरबीआई के चारों डिप्टी गवर्नर (विरल आचार्य, महेश कुमार जैन, एन एस विश्वनाथन, बीपी कानूनगो) सरकार के प्रतिनिधि (सुभाष चंद्र गर्ग, राजीव कुमार) और 12 स्वतंत्र निदेशक शामिल हैं। 

क्या है सेक्शन 7

आरबीआई एक्ट में सेक्शन 7 का प्रावधान है। इस सेक्शन का अगर सरकार इस्तेमाल करती है तो फिर आरबीआई गवर्नर के अधिकार पूरी तरह से कमजोर हो जाएंगे। वैसे तो रिजर्व बैंक अपने आप में एक स्वायत्त निकाय है और सरकार से अलग अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन कुछ तय स्थितियों में इसे सरकार के निर्देश सुनने पड़ते हैं। सेक्शन-7 लागू होने के बाद बैंक के कारोबार से जुड़े फैसले आरबीआई गवर्नर के बजाय रिजर्व बैंक के 'बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स' लेंगे। 

गवर्नर और उसके द्वारा नामित डिप्टी गवर्नर की ग़ैरमौजूदगी में भी 'सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स' के पास सरकार के दिए निर्देशों का पालन करने का अधिकार होगा। यानी 'बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स' वो सारे फैसले लेने के लिए स्वतंत्र होगा जो सामान्य तौर पर रिजर्व बैंक लेता है।
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आरबीआई पर लगाया था बड़ा आरोप

वित्त मंत्री अरुण जेटली आरबीआई पर यह आरोप लगा चुके हैं कि केंद्रीय बैंक 2008 से 2014 के बीच बैंकों को मनमानी कर्ज देने से रोकने में नाकाम रहा है और इसी वजह से बैंकों के एनपीए बढ़कर 150 अरब डॉलर हो गए।

राहुल गांधी ने कसा तंज

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज हो रही बोर्ड मीटिंग के बाद केंद्र आरबीआई को भी तबाह कर सकता है। मुझे उम्मीद है कि गवर्नर उर्जित पटेल और उनकी टीम ऐसा होने से आरबीआई को बचा लेगी। 
 
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