आरबीआई के पास पड़ी आरक्षित पूंजी में से सरकार को तीन लाख करोड़ रुपये की राशि मिल सकती है। जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा ने बिमल जालान समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह अनुमान लगाया है। मंगलवार को आई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को यह राशि तीन साल में मिलेगी। ऐसी संभावना है कि सरकार इस राशि का इस्तेमाल नियमित व्यय में करेगी।
आरबीआई के लिए उपयुक्त आर्थिक पूंजी की रूपरेखा निर्धारित करने के लिए पिछले साल दिसंबर में बिमल जालान समिति का गठिन किया गया था। समिति अगले महीने इससे संबंधित रिपोर्ट देगी। समिति की ओर से रिपोर्ट देने की समय-सीमा अब तक तीन बार बढ़ाई जा चुकी है।
ब्रोकरेज कंपनी अपनी रिपोर्ट में कहा कि बाजार की उम्मीदों के अनुसार आरबीआई के पास पड़ी आरक्षित पूंजी में से तीन लाख करोड़ रुपये तीन साल की अवधि के लिए किस्तों में दिए जाएंगे। हालांकि, कोष का हस्तांतरण कम होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई के पास अतिरिक्त पूंजी के रूप में अधिकतम साढ़े चार लाख करोड़ रुपये हो सकते हैं। समिति में शामिल सदस्यों का मानना है कि आरबीआई के लिए दुनियाभर में केंद्रीय बैंकों के सर्वाधिक माने जाने वाले मानकों का पालन किया जाए। वित्त मंत्रालय का मानना है कि सकल संपत्ति का 28 फीसदी बफर के रूप में केंद्रीय बैंक की ओर से रखना वैश्विक नियम 14 फीसदी से कहीं अधिक है।
तरलता बढ़ाने में हो सकता है उपयोग
रिपोर्ट के मुताबिक, 45 फीसदी संभावना है कि इस धन का इस्तेमाल सरकार के नियमित व्यय को पूरा करने में किया जाएगा। सिर्फ 20 फीसदी गुंजाइश है कि इसका उपयोग बैंकों में पूंजी डालने में होगा। वहीं, 25 फीसदी संभावना है कि आरबीआई के बकाये को चुकाने के लिए इस राशि का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा 10 फीसदी संभावना है कि सरकार इस राशि का तत्काल हस्तांतरण नहीं करेगी।