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पीएनबी में विलय के लिए सात बैंकों पर सरकार की नजर

बिजनेस डेस्क, अनर उजाला Updated Mon, 27 May 2019 08:24 PM IST
बैंकिंग क्षेत्र में मजबूती लाने और संचालन में सुधार करने के लिए सरकार एक बार फिर विलय की तैयारी में है। वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी बैंकों से बहीखाते की जानकारी मांगी है, जिसमें सात बैंकों पर उसकी विशेष नजर है। बहीखाते की समीक्षा के बाद चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में विलय प्रक्रिया शुरू हो सकती है।  

वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सभी बैंकों से संभावित विलय या अधिग्रहण की बाबत जानकारी मांगी है। आगे इस बात की समीक्षा की जाएगी कि इस कदम से परिचालन में कैसे तालमेल बनेगा और मजबूती आएगी। उन्होंने कहा कि सभी बैंक प्रमुखों को निर्देश दिए गए है कि वे वैकल्पिक तंत्र (एएम) के सामने प्रस्तुत होने से पहले विलय योजना पर काम करने के लिए खुद को तैयार रखें। इस एएम का गठन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017 में किया था। 

एएम की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद अक्तूबर-दिसंबर में विलय की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। तब तक सभी बैंकों को अपनी बैलेंस शीट सुधारने का मौका दिया जाएगा। मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि प्रस्ताव देने से पहले आंतरिक परीक्षण कर बेहतर मिलान के साथ योजना प्रस्तुत करें। इसमें कर्मचारियों की अदला-बदली से लेकर तकनीक और भौगोलिक परिस्थितियों का मिलान जरूरी है। 

इन बैंकों का विलय संभव 

सरकार हाल में बड़े फर्जीवाड़े का शिकार बने पंजाब नेशनल बैंक के इर्द-गिर्द विलय का खाका तैयार कर सकती है। बैंकों की वित्तीय स्थिति और उनके एनपीए के आधार पर सिंडीकेट बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, आंध्रा बैंक और इलाहाबाद बैंक को संभावित विलय की सूची मेें सबसे ऊपर रखा है। इसके अलावा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया को भी विलय को लेकर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया जा सकता है। वित्त मंत्रालय इस पर आखिरी फैसला अधिग्रहण करने वाले और लक्षित बैंकों के प्रस्ताव के बाद ही लेगा।

खस्ताहाल हैं अधिकतर बैंक

विलय के केंद्र में मौजूद पीएनबी को पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 248 करोड़ का लाभ हुआ था, जबकि आंध्रा बैंक को चौथी तिमाही में 1,234 करोड़ का घाटा हुआ और उसका एनपीए भी बढ़ गया। इलाहाबाद बैंक को भी भारी एनपीए के चलते चौथी तिमाही में 3,834 करोड़ का घाटा सहना पड़ा। हालांकि, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स को इस दौरान 202 करोड़ का लाभ हुआा, जबकि सिंडीकेट बैंक ने 128 करोड़ मुनाफा कमाया। ये सभी बैंक अभी आरबीआई के त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) फ्रेमवर्क से बाहर हैं। 

बढ़ेगी सरकार की बाजार उधारी

चालू वित्त वर्ष में सरकार अपने खर्चों को पूरा करने के लिए बाजार उधारी में इजाफा करने पर विचार कर रही है। सरकार की योजना 9.47 लाख करोड़ रुपये बाजार उधारी के रूप में लेने की है। इसमें सरकारी प्रतिभूतियों के अलावा महंगाई सूचकांक आधारित प्रतिभूतियां भी शामिल होंगे। इस साल अब तक सकल बाजार उधारी 1.69 लाख करोड़ रुपये रही है, जिसमें से 1.36 लाख करोड़ रुपये सरकारी प्रतिभूतियों से जुटाए गए हैं।  
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