साथ ही आरबीआई ने सभी बैंकों को सलाह दी है कि वो लोन लेने वालों की ईएमआई अगले तीन महीने के लिए टाल दें। इससे ग्राहकों को काफी फायदा होगा, लेकिन यह फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेशकों के लिए बुरा साबित हो सकता है।
फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों को नुकसान होने की आशंका
भारत में कई लोग एफडी पर निर्भर रहते हैं। आरबीआई ने दिसंबर 2019 से इसकी ब्याज दर में बदलाव नहीं किया है। बावजूद इसके बैंक एफडी की ब्याज दर में कटौती करते आए हैं। फरवरी और मार्च में देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने एफडी पर ब्याज दर में कटौती की थी। इससे ब्याज आय पर निर्भर लोगों खासतौर से वरिष्ठ नागरिकों को नुकसान होने की आशंका है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2004 के बाद पहली बार एसबीआई की फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर छह फीसदी से कम हुई है।
SBI फिक्स्ड डिपॉजिट (दो करोड़ रुपये से कम) पर इतना ब्याज दर देता है-
| अवधि |
आम नागरिकों के लिए ब्याज दर |
वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दर |
| सात से 45 दिन |
4.00 फीसदी |
4.50 फीसदी |
| 46 से 179 दिन |
5.00 फीसदी |
5.50 फीसदी |
| 180 से 210 दिन |
5.50 फीसदी |
6.00 फीसदी |
| 211 से एक साल |
5.50 फीसदी |
6.00 फीसदी |
| एक साल से दो साल |
5.90 फीसदी |
6.40 फीसदी |
| दो साल से तीन साल |
5.90 फीसदी |
6.40 फीसदी |
| तीन साल से पांच साल |
5.90 फीसदी |
6.40 फीसदी |
| पांच साल से 10 साल |
5.90 फीसदी |
6.40 फीसदी |
निवेशकों के लिए ये विकल्प हो सकते हैं लाभदायक
इस तरह अगर आप फिक्स्ड इनकम के विकल्प में निवेश के बारे में सोच रहे हैं तो आपको दूसरे विकल्प खंगालने चाहिए। जैसे नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट, किसान विकास पत्र, पोस्ट ऑफिस टर्म डिपॉजिट, आदि। इनके माध्यम से आपको बैंक द्वारा एफडी पर मिल रहे ब्याज से भी अधिक मुनाफा हो सकता है।
आइए जानते हैं रेपो रेट में कटौती से आपकी ईएमआई पर कितना असर पड़ेगा।
| लोन की राशि |
30,00,000 रुपये |
| अवधि |
20 साल |
| मौजूदा ब्याज दर |
7.95 फीसदी |
| मौजूदा ईएमआई |
24,999.92 रुपये |
| नई ब्याज दर |
7.20 फीसदी |
| नई ईएमआई |
23,620.47 रुपये |
| बचत |
2,379.45 रुपये |
बैंक लेंगे ये महत्वपूर्ण निर्णय
हालांकि लोन के ब्याज में कितनी कटौती होगी यह पूरी तरह से बैंकों पर निर्भर करेगा। हमने आपकी सुविधा के लिए एक चार्ट तैयार किया है जिसकी मदद से आप समझ सकते हैं कि लोन कितना कम हो सकता है।
इतनी की गई रेपो रेट में कटौती
मालूम हो कि केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति की तीन दिवसीय समिति की बैठक के बाद रेपो दर में 0.75 फीसदी की कटौती कर दी। इस कटौती के बाद रेपो दर 4.40 फीसदी पर आ गई। इसके साथ ही रिवर्स रेपो दर में भी 0.90 फीसदी की कटौती कर इसे चार फीसदी पर ला दिया। रिजर्व बैंक ने बैंकों के कैश रिजर्व रेश्यो में भी एक फीसदी की कमी की है जो कि घटकर तीन फीसदी रह गई। इन तमाम उपायों से अर्थव्यवस्था में 3.74 लाख करोड़ रुपये की नकदी बढ़ने का अनुमान है।