पिछले चार सालों की तुलना में वर्ष 2018 में बैंकों को 40 हजार करोड़ का चूना लगा था। इंडियन एक्सप्रेस ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ताजा रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि 2017 के मुकाबले यह करीब 72 फीसदी अधिक है। 2017 में बैंकों को 23933 करोड़ का चूना लगा था।
साल की शुरुआत में फरवरी महीने में पंजाब नेशनल बैंक में अब तक का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला हुआ था। हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी ने पीएनबी को 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई थी।
2017-18 में ऑफ-बैलेंस शीट ऑपरेशन, विदेशी मुद्रा लेनदेन, जमा खातों और साइबर गतिविधि से संबंधित धोखाधड़ी अहम है। 2017-18 में बैंक धोखाधड़ी के 5,917 मामले थे, जो पिछले वर्ष के 5,076 मामलों के मुकाबले आधी हैं। इस साल बैंकों ने सबसे अधिक साइबर धोखाधड़ी के मामले दर्ज किये. 2017-18 में 2,059 मामलों में 109.6 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि पिछले वर्ष 1,372 मामलों के साथ 42.3 करोड़ रुपये था।
एनपीए से जुड़े एक सवाल के जवाब में वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने बताया कि सरकारी बैंकों ने वित्त वर्ष 2014-15 से इस वित्त वर्ष तक फंसे हुए लोन के रूप में 2.33 लाख करोड़ रुपये वसूले हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों (पीएसबीएस) ने इस साल सितंबर के अंत तक विलफुल डिफाल्टरों (जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाले) के खिलाफ 2571 एफआईआर दर्ज कराए हैं। बकाए धन की रिकवरी के लिए 9,363 मुकदमें दर्ज हुए हैं और कर्ज नहीं चुकाने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।