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नोटबंदी के बाद 61,000 करोड़ रुपये घटा बैंकों का ऋण

Tue, 13 Dec 2016 04:28 PM IST
एजेंसी/ मुंबई
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नोटबंदी के बाद 25 नवंबर तक के पहले एक पखवाड़े में बैंकों के ऋण में 0.8 फीसदी या 61,000 करोड़ रुपये की गिरावट आई है। यह सूचना भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने ताजा आंकड़े में दी है। इसके साथ ही हालांकि नोटबंदी के कुछ सकारात्मक परिणाम भी मिले हैं। कर्जधारकों, जिनमें कुछ डिफाउल्ट एकाउंट भी शामिल हैं, ने इसी पखवाड़े में 66,000 करोड़ रुपये वापस भी चुका दिए हैं।
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इसी पखवाड़े में आम लोगों ने बैंक खातों में 4,030 अरब रुपये भी जमा कर दिए हैं और यह जमा राशि नौ दिसंबर तक 12,000 अरब रुपये के आंकड़े को पार कर गई है और जिससे सरकार की सभी आंकड़ेबाजी गड़बड़ हो गई है।
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'नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर देखा जा रहा है'

नोटबंदी के समर्थक कुछ विश्लेषकों ने शुरू में कहा था कि बंद किए गए 15,400 अरब रुपये में से 3,000 अरब रुपये से अधिक के नोट बैंक में वापस नहीं आ सकेंगे, जिससे सरकार को अकूत कमाई होगी। यह इस तरह से होगा कि सरकार इतनी राशि आरबीआई के बैलेंस शीट से राइट ऑफ कर देगी और आधिक्य के रूप में सरकार के खाते में हस्तांतरित कर देगी। लेकिन लगभग संपूर्ण बंद हुए नोट के प्रणाली में वापस आ जाने से सरकार की आंकड़ेबाजी गड़बड़ा गई है।

आरबीआई के मुताबिक 25 नवंबर तक बैंकों द्वारा दिया गया कुल ऋण 72,920 अरब रुपये था। इस दौरान साल-दर-साल आधार पर ऋण विकास दर सिर्फ 6.6 फीसदी दर्ज की गई, जो एक साल पहले 9.3 फीसदी थी। बैंक अधिकारियों का कहना है कि नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर देखा जा रहा है और ऋण की मांग में भारी गिरावट आई है।
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