आर्थिक सुस्ती के चलते भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बाद अब अन्य बैंकों ने दूसरी तिमाही में जीडीपी अनुमान के पांच फीसदी से नीचे रहने का अनुमान व्यक्त किया है। कोटक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक और क्रिसिल ने कहा कि निवेश और मांग में कमी के चलते कई सेक्टर बेहाल हो गए हैं। ऐसे में दूसरी तिमाही के दौरान विकास दर काफी कम रहेगी।
एसबीआई ने एक शोध रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर अनुमान में भारी कटौती की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल विकास दर 5 फीसदी रह सकती है, जो 6.1 फीसदी के पिछले अनुमान जताया था। इकोरैप नाम से जारी रिपोर्ट में एसबीआई ने दूसरी तिमाही में विकास दर 4.2 फीसदी रहने की बात कही है।
सिंगापुर के डीबीएस बैंक ने कहा है कि भारत के लिए चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के विकास दर आंकड़े काफी अहम होंगे। सरकार 29 नवंबर को जुलाई-सितंबर तिमाही के जीडीपी वृद्धि दर के आंकड़े जारी करेगी। डीबीएस ने कहा कि जून में समाप्त पहली तिमाही में आंकड़े छह साल के निचले स्तर पर 5 फीसदी पहुंच गए।
बैंक ने कहा कि जीडीपी के बुरे आंकड़े एक बार फिर रुपये को कमजोर बना सकते हैं। सोमवार को डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा 71.47 रुपये के स्थर पर थी, जो साल के आखिर तक 72.5 के पार जा सकती है। औद्योगिक उत्पादन में लगातार गिरावट और कम निवेश की वजह से अर्थव्यवस्था की चुनौतियां बरकरार हैं।