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सितंबर में 84 फीसदी बढ़ा कार्ड से लेनदेन, 74 हजार करोड़ के पार पहुंचा डिजिटल ट्रांजेक्शन

Sun, 19 Nov 2017 11:42 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सितंबर महीने में डेबिट-क्रेडिट कार्ड से हुए ट्रांजेक्शन में 84 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली। केंद्र सरकार द्वारा डिजिटल तरीके से लेन-देन को बढ़ावा देने से अकेले सितंबर में 74 हजार करोड़ से अधिक का लेन-देन हुआ। 
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पिछले साल सितंबर में हुआ था इतना लेनदेन
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल सितंबर के महीने में केवल 40130 करोड़ का लेनदेन डिजिटल तरीके से हुआ था। इस साल इस तरीके से लेनदेन बढ़ाने में प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन का ज्यादा योगदान रहा। पिछले साल जहां केवल 203 मिलियन ट्रांजेक्शन हुए थे, वहीं इस साल सितंबर महीने में यह आंकड़ा 378 मिलियन के पार चला गया। 

पढ़ें- 31 दिसंबर तक एसबीआई ग्राहकों को करना होगा ये काम, वर्ना हो जाएगी परेशानी

नोटबंदी के बाद से बढ़ रहा है तरीका
वर्ल्ड लाइन दक्षिण एशिया के सीईओ दीपक चंदानी ने कहा कि पिछले साल हुई नोटबंदी के बाद से हर महीने डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल करके लेनदेन काफी बढ़ गया है। 2014 में लॉन्च की गई जन धन योजना के बाद से कार्ड का प्रयोग काफी बढ़ा है। 
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22 फीसदी के हिसाब से बढ़ा डेबिट कार्ड का प्रयोग
जन धन खातों की वजह से डेबिट कार्ड से होने वाले ट्रांजेक्शन 2015 में 39 फीसदी बढ़त के साथ हुए थे, वहीं नोटबंदी के बाद से इनका औसत 22 फीसदी रहा है। इसी तरह 2016 से 2017 के बीच क्रेडिट कार्ड में 24 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिली। 2011-16 के बीच इसमें 9 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिली है। 
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122 फीसदी रही पूरे देश में ग्रोथ

देश के सबसे बड़े बैंक, एसबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी ने भारत को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अन्य देशों के मुकाबले तीन वर्ष आगे पहुंचा दिया है। बजार में चल रहे विभिन्न प्रकार के प्रीपेड उपकरण जैसे मोबाइल वॉलेट, पीपीआई कार्ड, पेपर वाउचर और मोबाइल बैंकिंग में भी एक साल पहले के मुकाबले 122 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उल्लेखनीय है कि भारत की उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी और डिजिटल भुगतान रीढ़ की हड्डी है।

फिनटेक की सबसे अधिक स्वीकृति भारत में
अंतर्राष्ट्रीय कंसल्टेंसी कंपनी ईएंडवाई की वर्ष 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में इस समय फिनटेक की सबसे अधिक स्वीकृति भारत में है, जो कि 52 फीसदी है। इस समय देखें तो देश के टोल प्लाजा, बस, रेलगाड़ी, सिनेमा टिकट आदि की खरीदारी, ई-कामर्स साइट से ऑनलाइन खरीदारी, पेट्रोल पंप, रेस्तरां आदि में करीब 15 करोड़ भारतीय नियमित रूप से डिजिटल साधनों से भुगतान कर रहे हैं।

इस समय करीब एक करोड़ कारोबारी भी डिजिटल भुगतान स्वीकारने में सक्षम हैं। मान लिया जाए कि यदि हर डिजिटल भुगतान करने वाला यदि हर महीने करीब तीन हजार रुपये भी इस तरीके से खर्च करता है तो हम रोजाना लगभग एक करोड़ लेन देन डिजिटल तरीके से करते हैं।

सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
मोबिक्विक की सह संस्थापक उपासना टाकू का कहना है कि आमतौर पर लोग डिजिटल भुगतान के तरीके की सुरक्षा को शक की निगाह से देखते हैं, लेकिन ऐसा है नहीं। क्रेडिट या डेबिट कार्ड से भुगतान पूर्णत: सुरक्षित तो है ही, मोबाइल वॉलेट से किया गया भुगतान क्रेडिट कार्ड या नकद से भी ज्यादा सुरक्षित है। क्योंकि बायोमेट्रिक्स जानकारी, मजबूत पासवर्ड आदि इसकी सुरक्षा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

नोटबंदी का अर्थव्यवस्था की विकास दर पर असर नहीं
क्लियर टैक्स के संस्थापक और सीईओ अर्चित गुप्ता का कहना है कि यूं तो नेाटबंदी से किसान, दिहाड़ी मजदूर, लघु उद्यमी और छोटे कारोबारी बुरी तरह से प्रभावित हुए लेकिन इससे विकास दर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा।

आप यदि पिछले वर्ष की तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि नोटबंदी से विकास दर पर कोई असर नहीं पड़ा। औद्योगिक विकास दर में मामूली गिरावट हुई। इससे आम लोगों को भी थोड़ी सी ही परेशानी हुई, वह भी शुरुआत में। बाद में सब कुछ ठीक हो गया।
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