भारतीय रेल की स्थिति इस वक्त एक
कामकाजी महिलाओं की तरह हो गई है, जिससे उसको दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। वहीं
रेलवे को इस वक्त जरुरत है कि वो यात्री किरायों को बढ़ाकर के मालभाड़ा की दरों को कम करें, जिससे यात्री किरायों पर दी जा रही सब्सिडी का बोझ कम हो।
रेल मंत्रालय के पूर्व वित्तीय सलाहकार और रेल वित्त विकास निगम के पूर्व डायरेक्टर हरीशचंद्र ने amarujala.com पर आयोजित विशेष फेसबुक लाइव के दौरान चर्चा करते हुए कहा कि जिस तरह से कामकाजी महिलाओं को घर और ऑफिस में बैलेंस अप्रोच रखना होता है वैसा ही हाल रेलवे का है।
रेलवे को वेलफेयर स्टेट की तरह जहां एक तरफ किराये कम रखने पड़ते हैं, वहीं कंपनी की तरह प्रॉफिट कमाने पर भी फोकस रखना पड़ता है।
किराये पर रेलवे देती है सबसे ज्यादा सब्सिडी
हरीशचंद्र ने कहा कि इस वक्त किराये पर रेलवे सबसे ज्यादा सब्सिडी देता है। देश में सबसे ज्यादा मुंबई लोकल के यात्रियों को किराये में सब्सिडी मिलती है। वहीं रेलवे में किराये का स्ट्रक्चर काफी अजीब है। जहां मालभाड़ा ज्यादा है, वहीं किराये काफी कम है, जिससे रेलवे को प्रॉफिट में नहीं लाया जा सका है। मालभाड़ा बढ़ाकर रेलवे ने अपने को बर्बाद कर लिया है।
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बुलेट ट्रेन से रेलवे को मिलेगी नई टेक्नोलॉजी
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भारत में मुंबई-अहमदाबाद के बीच पहले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनना रेलवे के लिए काफी फायदेमंद होगा। इससे जहां एक तरफ रेलवे को नई टेक्नोलॉजी मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ यह रेलवे की बैलेंस शीट को किसी तरह से प्रभावित नहीं करेगा। बुलेट ट्रेन के लिए रेलवे को 80 फीसदी लोन मिला है।
गैंगमैन की है कमी
रेलवे में इस समय करीब तीन लाख से अधिक पद खाली पड़े हैं। एक समय में रेलवे सबसे बड़ा रोजगारदाता था, जब 16 लाख से अधिक लोग इससे जुड़े थे। वहीं अब यह संख्या 13 लाख के करीब है। ऑपरेशन में बहुत से पद खाली पड़े हैं, जिनको भरना जरूरी है। सबसे ज्यादा कमी रेलवे में गैंगमैन की है, जो कि सुरक्षा की दृष्टि से काफी गंभीर बात है। यह लोग पटरियों की सुरक्षा पर ध्यान देते हैं, ताकि दुर्घटनाएं न हो।