52 हजार करोड़ के घाटे से जूझ रही एयर इंडिया अब कॉस्ट कटिंग के मूड में आ गई है। कंपनी अब देश भर के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर ली हुई किराये की जमीन और हैंगर को खाली करने जा रहा है, जिससे उसके फालतू के खर्चों पर लगाम लग सके।
एयर इंडिया के सीएमडी राजीव बंसल ने कहा कि वो एयरलाइंस की ऑन टाइम पर्फोमेंस, कस्टमर सर्विस पर भी ध्यान दे रहे हैं। बंसल ने कहा कि वो कंपनी द्वारा एयरपोर्ट पर कबाड़ रखने के लिए ली गई किराये की जमीन और हैंगर को भी जल्द खाली करेंगे, ताकि इसके अतिरिक्त किराये को भी न देना पड़े।
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संसद की कमेटी के सामने उठाया था मुद्दा
बड़े घाटे का सामना कर रही एयर इंडिया ने पार्लियामेंट कमेटी के सामने जमीनी विवाद का मुद्दा उठाया है। एयर इंडिया ने कमेटी को बताया कि उसकी संपत्तियों में अलग-अलग कंपनियों के जुड़े होने की वजह से वे उन्हें बेच नहीं पा रही है, जिसकी वजह से जमीनों के मॉनिटाइजेशन में दिक्कतें आ रही हैं।
दअसल, कंपनी ने जमीनों के जरिए करीब 5000 करोड़ रुपये की रिकवरी का प्लान बनाया है, जिसके लिए 2012-13 से 2021-22 के बीच डेडलाइन रखी गई है। एयर इंडिया का कहना है कि वो जमीनी विवाद की वजह अब तक सिर्फ 369 करोड़ रुपये ही जमा कर पाई है।
6300 करोड़ की दो संपत्तियों को बेचने में एयर इंडिया को इसी परेशानी का सामना करना पड़ा है। ये दोनों प्रॉपर्टीज शहरी विकास मंत्रालय की ओर से लीज पर दी गई है और इन्हें बेचा नहीं जा सकता। इसके अलावा ऐसे और कई कारण हैं, जिनके चलते एयर इंडिया अपनी कई जमीनों को नहीं बेच पा रहा है।
दरअसल, एयर इंडिया की बड़ी हिस्सेदारी बेचने से पहले केंद्र रियल एस्टेट और गैर कंपनियों से जुड़ी संपत्तियों को बेचने की योजना बना रहा है। केंद्र सरकार की ओर से ये बड़ा इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि एयर इंडिया लगातार घाटे का सामना कर रही है।